सईद नादां, बेगमगंज
जिले भर में बिखरी ओर गुटों में बटी कांग्रेस को अस्त्तिव की लड़ाई लड़ना पड़ रही है। पिछले विधानसभा में कांग्रेस 4 सीट में से बामुश्किल एक सीट सिलवानी जीत पाई थी , जबकि तीन सीट सांची , उदयपुरा एवं भोजपुर पर पराजय का सामना करना पड़ा था।
चुनाव के बाद कांग्रेस सन्नपात में चली गई थी। जो धीरे-धीरे उबर रही थी कि जिला कांग्रेस के दो साल से खाली पड़े पद को पाने के लिए कई कांग्रेसियों में होड़ लग गई।
संगठन के चुनाव के नाम पर शीर्ष नेतृत्व ने विधानसभा एवं जिले बार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करके दो महीने तक दावेदारों से खूब मशक्कत कराई । प्रत्येक विधानसभा में सर्वे के नाम पर रायशुमारी के लिए दावेदारों से भीड़ जुटवाई।
कई दावेदारों का पलड़ा भारी रहा और एक अरसे के बाद उन्हें उम्मीद जागी कि अब जिला अध्यक्ष पद पर सही चयन होगा।
पर्यवेक्षकों ने रायशुमारी के बाद दावेदारों को आश्वस्त किया कि उनकी रिपोर्ट निष्पक्षता से हाईकमान को दी जाएगी।
दावेदार अपनी -अपनी ताजपोशी होने की कवायद लगा रहे थे, लेकिन राहुल गांधी ने आदत के अनुसार फिर बम फोड़ दिया।
पर्यवेक्षकों की माथापच्ची एवं रायशुमारी , सर्वेक्षण सब धरा रह गया ओर कर्णधारों के कोटे के अनुसार ऊपर से ही अध्यक्ष थोप दिए गए हैं।
रायसेन जिले में आधा दर्जन प्रमुख दावेदार अपनी -अपनी नियुक्ति को लेकर निश्चित थे कि इस बार उन्हें मौका मिलेगा और वो वर्षो से बिखरी , गुटों में बटी ओर ज्यादातर हिस्सों में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस को मजबूत करेंगे। ताकि पूर्व की भांति 4 नहीं तो कम से कम तीन विधानसभा सीट कांग्रेस फिर से पा ले। जो पिछले चुनाव में हाथ से निकल गई थी , लेकिन ऐसे दावेदारों को निराशा हाथ लगी है।
नवनियुक्त अध्यक्ष के सामने बड़ी चुनोती
पार्टी ने कमलनाथ कोटे से पूर्व में रहे जिलाध्यक्ष विधायक देवेंद्र पटेल पर शीर्ष नेतृत्व ने फिर से विश्वास करते हुए संगठन की कमान इस उम्मीद से सौंपी है कि वो जिले में कभी कांग्रेस का कैंसर रहे प्रदेश के एक कद्दावर नेता जो अब भाजपा में है , उनकी कार्यप्रणाली से जिले में खत्म प्रायः हो गई कांग्रेस को पुर्नजीवित करने के लिए कोई कोरकसर नहीं छोड़ेंगे । नवनियुक्त जिलाध्यक्ष देवेंद्र पटेल को इसके लिए हाड़तोड़ मशक्कत करना पड़ेगी।
दूसरा चाटुकारों से हटकर कर्मठ , निष्ठावान ओर जनाधार वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं ओर सभी वर्गों को साधने के लिए अपना अहम छोड़ना होगा।
विधायक रहते अपने किले को मजबूत रखने के साथ जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का किला भी मजबूत करना होगा । तब उनको सौंपी जिम्मेदारी सार्थक होगी, अन्यथा पद लेने का कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा। गुटबाजी से हटकर सभी को साथ लेकर चलने ओर कद के अनुसार सभी वर्गों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को यथोचित सम्मानजनक पदों पर समायोजित करना होगा।
ये काँटों भरा ताज है , जिसे बरकरार रखने के लिए जिलाध्यक्ष को अग्निपरीक्षा में खरा उतरने की ठान लेना चाहिए। शीर्ष नेतृत्व की मंशानुसार 2028 के विधानसभा एवं 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी को अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार करना होगा जो बेहद कठिन है लेकिन कुछ भी मुश्किल नहीं है गर ठान लीजिए ।
फोटो - नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र पटेल (विधायक)
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