सईद नादाँ, बेगमगंज
कभी नगर की कन्याओं के लिए अग्रणी रही शासकीय कन्या माध्यमिक शाला किला बेगमगंज ( डाइस कोड 222839 ) पिछले 10 साल से फर्जी विद्यार्थियों के नाम दर्जकर शिक्षकों को नगरीय क्षेत्र में पदस्थ रखने के षड्यंत्र के चलते अब खत्म हो गई है।
अपनी पदस्थापना नगरीय क्षेत्र में बरकरार रखने के कारण उनकी पोल खुलने पर अब वो खत्म हो गई है।
जब भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शाला का निरीक्षण किया गया , तब नाममात्र के चार-पांच विद्यार्थी स्कूल में मौजूद मिले।
जिसे गंभीरता से लेते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा इस वर्ष उक्त स्कूल को खत्म करने के लिए विभाग को प्रतिवेदन भेजकर बंद कर दिया और वहां के मात्र 7 विद्यार्थियों के नाम दूसरी शालाओं में दर्ज कराकर वहां समावेश करा दिया है।
इसके साथ ही स्कूल में पदस्थ चारों शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में अटैच किया गया है।
सूत्रों के अनुसार गर्ल्स हॉयर सेकेंडरी स्कूल परिसर में लगने वाली शासकीय कन्या माध्यमिक शाला किला में आधा दर्जन शिक्षक पदस्थ रहे और विद्यार्थी मात्र 10 - 12 रहे।
मोनोपोली के तहत शिक्षकों ने फर्जी विद्यार्थी के नाम उपस्थिति पंजी में दर्जकर रखे थे।
जिसके कारण अब तक उक्त कामचोर शिक्षक वहां पदस्थ रहे लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार आने के बाद उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों पर जब विशेष फोकस करके जांच करवाना शुरू कराया तो उक्त शाला की पोल खुल गई।
स्कूल में कक्षा छठवीं से आठवीं तक मात्र 7 विद्यार्थियों के नाम दर्ज पाए गए और चार शिक्षक पदस्थ थे।
जिनमें प्रधान अध्यापक बीएस कर्णवंशी जिन्हें अब माध्यमिक शाला मेहगवां टप्पा भेजा गया है । श्रीमती शालिनी जैन उन्हें यथावत कन्या हॉयर सेकेंडरी स्कूल के मिडिल सेक्शन में अटैच किया गया है।
चंचल बलैया को शा. बालक माध्यमिक शाला किला एवं श्रीमती रफिया बेगम को गर्ल्स हॉयर सेकेंडरी स्कूल में अटैच किया गया है ।
बरसों से शहरी क्षेत्र में पदस्थ रहने का षड्यंत्र करके शिक्षकों द्वारा शिक्षा विभाग एवं शासन की आंखों में धूल झोंकी जा रही थी।
परिसर में ही लगने वाली शासकीय कन्या प्राथमिक शाला की भी कमोबेश यही स्थिति है वहां 28 विद्यार्थी दर्ज हैं जबकि दो शिक्षक मुकेश विश्वकर्मा एवं सुनीता बलेया पदस्थ हैं। इधर भी आपको एक शिक्षक और नाममात्र के 7 - 8 विद्यार्थी उपस्थित मिलेंगे। यहां भी फर्जी एडमिशन की आशंका व्यक्त की गई है।
नगरीय क्षेत्र की अन्य प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं की भी कमोनेश यही स्थिति है। उपस्थिति पंजी पर विद्यार्थियों के नाम तो बहुत ज्यादा दर्ज है लेकिन शाला में नाममात्र के विद्यार्थी मौजूद मिलते हैं।
शहरी क्षेत्र एवं आसपास रहने का मोह फर्जी एडमिशन की वजह बना हुआ है।
नगरीय एवं ग्रामीण अंचल में जिन बच्चों के नाम प्राथमिक शालाओं में दर्ज हैं वो ही नाम आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी दर्ज हैं।
शालाओं एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के फर्जीबाड़े को पकड़ने के लिए दोनों संस्थाओं के पंजीयन रजिस्टर को जब्त करके जांच की जाना आवश्यक है ताकि असलियत सामने आए ।
जब-जब वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शालाओं का निरीक्षण किया गया तब - तब नाम मात्र के विद्यार्थी उन्हें मिले हैं।
शिक्षा विभाग के द्वारा नियम विरुद्ध एक स्कूल में कई - कई शिक्षक अतिरिक्त पदस्थ किए गए हैं ।
जिन्हें आज तक जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किसी कारणवश नहीं हटाया गया है। दूसरी ओर ग्रामीण अंचल की शासकीय शालाओं में सैकड़ो विद्यार्थियों पर एक या दो शिक्षक पदस्थ हैं ।
इस संबंध में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि शासकीय कन्या माध्यमिक शाला किला में जांच में पाया कि कुल 7 विद्यार्थी थे और चार शिक्षक पदस्थ हैं। उन्होंने उक्त शाला को बंद करके विद्यार्थियों को अन्य शाला में प्रवेश दिलवाया है।
जबकि वहां के शिक्षकों को अन्य शालाओं में अटैच किया गया है। विभाग द्वारा अभी उनकी पोस्टिंग नहीं की है। इसलिए चारों शिक्षक अटैचमेंट पर चल रहे हैं ।
फोटो - बेगमगंज की शा. कन्या मा. शाला किला जो अब खत्म हो गई है।
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