एक ऐसा मंदिर जहां प्रसाद की जगह भक्त चढ़ाते हैं घड़ियां

 


क्या आपका समय ठीक नहीं चल रहा है?

 क्या आप महसूस करते हैं कि बनते काम बिगड़ रहे हैं?

 क्या आपको समझ में नहीं आ रहा कि कहां ले जा रही है जिंदगी?

----- डॉ योगिता जौहरी 

 अगर आपके मन में हमेशा यह आता है कि कोई भी तरीका मिल जाए जिससे आपका समय अच्छा हो जाए तो आपका पसंदीदा जियान न्यूज के पास आपके लिए एक बहुत अच्छी सलाह है।

 आपको बहुत छोटा सा काम करना है, अपने समय को सुधारने के लिए। जी हां आपको एक मंदिर में जाकर बस एक घड़ी चढ़ानी है और फिर महसूस कीजिए अपनी आने वाली जिंदगी में आने वाले परिवर्तन को। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की जावरा तहसील के एक गांव के पास स्थित घड़ी वाले बाबा के मंदिर की , जो उज्जैन शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर पर पहुंचते ही हम पाते हैं कि मंदिर तो एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे छोटा सा ही है , पर उस बरगद के पेड़ पर चारों तरफ काफी ऊंचाई तक अलग-अलग आकार, रंगों और ब्रांड की घड़ियां लटकी है। यही नहीं आसपास की झाड़ियां और पेड़ों पर भी घड़ियां ही घड़ियां बंधी हुई है। इसके बावजूद भी जब पेड़ों पर कोई जगह खाली नहीं बची तो मंदिर के पीछे खाली मैदान में भी श्रद्धालुओं द्वारा लाई गई गाड़ियों का बड़ा पहाड़ बन चुका है। श्रद्धालुओं का दिन भर तांता लगा रहता है और देर शाम तक भी दूर-दूर से लोग आते रहते हैं। गहरी रात में भी टिक टिक की आवाज सुनाई देती है। कुछ मन्नत को मन में लेकर घड़ी चढ़ाते हैं, तो कुछ मन्नत पूरी होने पर घड़ियां चढ़ाते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि लगभग 50 वर्ष पहले ही यह मंदिर अस्तित्व में आया है । किसी को सपने में आया और शुरुआत में कुछ लोगों की मन्नत पूरी हुई इसके बाद यह सिलसिला शुरू हो गया और आज इस मंदिर में काफी दूर-दूर से लोग आने लगे हैं।

 अब हम आपको इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बताते हैं। उज्जैन के पास महिदपुर और उन्हेंल के बीच में यह मंदिर है , जहां पक्की सड़क द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

टिप्पणियाँ