महू स्थित आंबेडकर विश्वविध्यालय में आजादी के अमृत महोत्सव में स्वावलंबी भारत अभियान विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

*भारत की महान परंपरा स्वावलंबन पर आधारित रही है- प्रो. डी.के.शर्मा*

*स्वावलंबी भारत अभियान पुनः भारत को सोने की चिड़िया बनाए जाने कि ओर अग्रसर- श्री सुजीत सिंघल*

*अपनी मानसिकता में रोजगार सृजनकर्ता का विचार पैदा करना होगा- श्रीमती अलका सैनी*

 डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव में स्वावलंबी भारत अभियान विषय पर आयोजित संगोष्ठी में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रो. डी. के. शर्मा, कुलपति ब्राउस ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय निरंतर नई पीढ़ी के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बहुत सहज और समृद्ध बनाने की दिशा में कार्यरत है। विश्वविद्यालय में जैविक खेती का पाठ्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। उन्होंने अतिथियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञपित करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इससे बच्चों में निश्चित रूप से नई प्रेरणा आई है। उन्होंने कहा कि भारत की महान परंपरा स्वावलंबन पर आधारित रही है। यह अभियान भारत को विश्व समुदाय के समक्ष सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य पर आधारित है। 

स्वावलंबी भारत की संकल्पना को साकार करने के अभियान में देश के हर युवा की भूमिका जरूरी है। आज देश में 37 करोड़ से अधिक युवा हैं जिन्हें रोजगार की जरूरत है। मैकाले शिक्षा नीति का प्रभाव यह है कि हम नौकरी की मानसिकता में आ गए हैं। हमें अपनी मानसिकता में रोजगार सृजनकर्ता का विचार पैदा करना होगा। जरूरी नहीं कि सभी के विचार में ऐसा हो परंतु जिनके मन में उद्यमिता का विचार आता है उन्हें स्वावलंबी बनने की ओर बढ़ाना चाहिए। स्वावलंबी भारत अभियान भारत के युवाओं के भीतर मौजूद कौशल क्षमता को पहचान कर उन्हें भारत का भविष्य निर्माता बनाना है। यह बात अलका जी सैनी राष्ट्रीय सह महिला प्रमुख स्वदेशी जागरण मंच द्वारा कही गयी। उन्होंने कहा कि हमें अपने आसपास कि चीजों की पहचान कर और उसके जरिये उद्यम कर भारत को स्वावलंबी बनाना। युवा उद्यमी डॉ प्रियंका मोछमार ने गुरु और शिष्य के बीच वार्तालाप को बहुत अच्छा वार्तालाप बताया। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युवा उद्यमी की पहचान बनाने वाली प्रियंका जी ने आगे कहा कि हमारे मस्तिष्क में विचार आया और उस पर शत प्रतिशत निष्ठा और विश्वास के साथ श्री प्रणव जी के साथ वायुइंडिया के साथ आगे बढ़कर आज हम रोजगार निर्माणकर्ता बने हैं। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ने से सफलता मिलना तय है। युवा को नए भारत का निर्माण करना है जिसमें हम सब की भूमिका है।  

जैविक खेती से स्वावलंबन की कहानी रचने वाले श्री आनंद ठाकुर जी ने अपनी सक्सेस स्टोरी बताते हुए कहा कि मैंने प्राइवेट जॉब करते हुए मेरे मन में विचार आया क्यों न हम अपनी खेती को रोजगार का जरिया बनाएँ। और ऐसा करके जैविक कृषि के साथ आगे बढ़ा। जैविक कृषि को 2003 से प्रारंभ किया। इस कार्य में किसी मीडियेटर को नहीं आने दिया। आज जैविक खेती से वैल्यूएडेड प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में भी भेजा जा रहा है। कई लोगों को रोजगार भी देना संभव हो रहा है। स्वावलंबी भारत की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए श्री सुजीत सिंघल, इंदौर विभाग समन्वयक स्वावलंबी भारत अभियान ने कहा कि भारत सोने की चिड़िया था यह बात इसीलिए कही जाती हैं कि हम इतने समृद्ध और संपन्न थे । भारत के 37 करोड़ युवा , आज भारत को पुनः सोने की चिड़िया बना सकते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति ले गए। विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का जो योगदान उस समय रहा था ,आज कल्पना नहीं की जा सकती है। स्वावलंबी भारत अभियान पुनः भारत को सोने की चिड़िया बनाए जाने कि ओर एक महत्वपूर्ण कदम हैं , इस विचार को आप सभी युवाओं को आगे बढ़ाना और अपनाना होगा । भारत का कुटीर उद्योग बहुत समृद्ध रहा है। कुटीर उद्योग को खत्म कर इंडस्ट्री बना दी। हमें पुनः अपनी जड़ो से जुड़कर आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की बहुत सी नीति है जो नए आइडिया के साथ आने वाले नव उद्यमियों की आर्थिक मदद भी करती है। हमें अपने कोशल को प्रशिक्षण के साथ जीवन से जोड़कर उद्यमिता के क्षेत्र में सफलता हासिल करनी है। कार्यक्रम के अंत में आभार ज्ञापन कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा द्वारा किया गया।डॉ. विशाल पुरोहित द्वारा कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं विद्यार्थियों को पुनः बनाए भारत महान पुस्तक पढ़ने एवं स्वावलंबी भारत अभियान से जुड़कर स्वरोजगार के क्षेत्र में रोजगार सृजन हेतु प्रेरित किया गया। मंचासीन प्रो. एम.एम.पी. श्रीवास्तव, नैक सलाहकार एवं विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी, कर्मचारी उपस्थित रहे। 





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