"सदी का आवेदन" ~कहा कि तालाबों पर कॉलोनी काटने वालों पर करों ‘कार्रवाई, कलेक्टोरेट से पत्र पहुंचा नगरपालिका, अमला हैरान किस पर करें कार्रवाई, कहां से करें शुरुआत

आशीष यादव, धार

95 साल की एक महिला के आवेदन ने नगरपालिका अमले को परेशानी में डाल दिया है। करीब 1 सदी के जीवन के नजदीक पहुंची कमलाबाई नाम की महिला ने कलेक्टर को आवेदन देकर शहर के साढ़े 12 तालाबों में शामिल 6 तालाबों पर कॉलोनी काटने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रही है। पत्र कलेक्टोरेट से नगरपालिका पहुंचा है। नगरपालिका में इंजीनियर से लेकर अधिकारियों का अमला नया है। अधिकारी समझ नहीं पा रहे हैं कि इस पत्र पर किस तरह कार्रवाई करें। दरअसल तालाबों की जानकारी नए अधिकारियों को नहीं है। वर्षों पूर्व तालाबों पर बसी कॉलोनियों को लेकर कैसे कार्रवाई की शुरुआत करें, यह दुविधा है। ऐसी स्थिति में अब आवेदन को राजस्व विभाग को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

इतनी बड़ी कार्रवाई संभव नहीं

शहर को साढ़े 12 तालाबों की नगरी कहा जाता है। रिकार्ड में भी तालाब दर्ज है। इसके बावजूद शहर में 4-5 तालाबों के अतिरिक्त तालाब नहीं है। जिला प्रशासन जनकल्याण हितार्थ दी गई दान की भूमि अफरा-तफरी मामले में एक जांच प्रारंभ कर चुका है। ऐसी परिस्थिति में 95 वर्षीय महिला के आवेदन पर कोई कार्रवाई प्रारंभ हो इसकी उम्मीदें कम है। दरअसल तालाबों पर कटी कई कॉलोनियों से दोनों राजनैतिक दलों के नेताओं के हाथ शामिल है। ऐसी परिस्थिति में कामों के बोझ से दबे सरकारी विभाग नया मोर्चा खोले इसकी उम्मीदें कम है।

वृद्धा ने बताई तालाबों की सीमाएं  

महिला कमलाबाई ने अपने आवेदन में 6 तालाबों पर कॉलोनी काटे जाने की जानकारी दी है। उन्होंने भू माफियाओं पर कार्रवाई की मांग की है। महिला ने लिखा है कि पुराने राजस्व रिकार्ड निकाले जाए। नक्शों को देखा जाए। तालाबों को जमीन से हटाने की शुरुआत कहां से हुई और इसमें शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाए।

1. महिला ने आवेदन में बताया कि रामफाटिया का तालाब त्रिमूर्ति नगर (वर्तमान में बसी हुई कॉलोनी) स्टेट समय में बनाया गया था। यहां पर कॉलोनी बस गई।

2. पूर्निया तालाब पाटीदार हॉस्पिटल से गुलमोहर कॉलोनी था। इस पर भी कॉलोनी काट दी गई है।

3. लेंडिया तालाब पर र्इंट भट्टे वालों ने कब्जा कर लिया है।

4. हिम्मतगढ़ चौसठ माता में स्थित है। इसको भी धीरे-धीरे आधा कर दिया गया है।

5. नौगांव क्षेत्र में दो तालाब कुंज और मुंज थे। यह दोनों राजाओं के नाम पर बनवाए थे। मुंज-कुंज का क्षेत्रफल तोरनोद तक था। कुंज तालाब को भू माफिया खा गए हैं।

6. मसुरिया तालाब, इस पर भी कब्जा कर लिया है। यह मांडव नाका पर स्थित है।

किताब धार डिग्री कॉलेज में मौजूद

आवेदक कमलाबाई ने बताया कि धार के राजा ने इस तरह जल संरचनाएं बनाई थी कि एक तालाब के लबालब होने पर उसका पानी दूसरे तालाब में जाता था। सबसे पहले रामफाटिया तालाब भराता था उसके बाद पूर्निया। पुर्निया से पानी लेंडिया तालाब में जाता था और वहां से हिम्मतगढ़। धार के पूर्व प्रिंसिपल श्री लुनिया ने धार का इतिहास लिखा था। उस पुस्तक का नाम था धारानगरी। यह पुस्तक धार डिग्री कॉलेज में आज भी मौजूद है।  

चित्र है- 




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