मामला अहमदाबाद ब्लास्ट के आरोपियों का, धार व एसटीएफ पुलिस ने किया था गिरफ्तार पीथमपुर से

आशीष यादव, धार

धार में विरोध देखने के बाद सिमी सरगना के अधिवक्ताओं ने इंदौर करवाया था केस ट्रांसर्फर, ट्रेनिंग प्रोग्राम से लेकर कई दस्तावेज हुए थे बरामद, धार एडिशनल एसपी की टीम ने की थी कार्रवाई, सीएम ने तब किया था सम्मानित

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में शुक्रवार को कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपियों को सजा सुनाई हैं, इस मामले में गुजरात की विशेष अदालत ने 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। कुल 49 दोषी थे। शेष 11 को उम्र कैद सुनाई गई है। कहा जा रहा है कि देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इस प्रकरण का सीधा कनेक्शन धार जिले से जुडा हुआ हैं, क्योंकि शुक्रवार को जिन आरोपियों को सजा सुनाई गई है। उन्हें गिरफ्तार धार की औधोगिक नगरी पीथमपुर से किया गया था। तब धार पुलिस के अतिरिक्त इंदौर एसटीएफ टीम की मदद से लेकर एडिशनल एसपी सहित पुलिस टीम ने दबिश दी थी व करीब 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 


जंगल में की थी मीटिंग 

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 00 मार्च 2008 को मुखबिर से पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी कि सिल्वर ऑर्क फैक्ट्री के पास तालाब किनारे जंगल में शाम 7 बजे कुछ लोगों ने एक बैठक की थी, इसके बाद सभी लोग इंदौर गए हैं। तब धार में पदस्थ रहे एडिशनल एसपी बीरेंद्र सिंह ने इस बात की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों काे दी। अगले दिन सुबह 5 बजे पुन सूचना प्राप्त हुई कि सिमी के लोग माणिकबाग रोड इंदौर रोड स्थित एक मकान में हथियारों से लैस होकर रुके हुए हैै। इसके बाद धार पुलिस व एसटीएफ की एक विशेष टीम ने दबिश दी। मकान की तीसरी मंजिल पर स्थित कमरों में सभी आरोपी छुपे हुए थे, पुलिस ने पहले कमरे से सिमी प्रमुख सफदर हुसैन नागौरी व पांच साथियों को पकडा व अंदर के कमरे से 8 आरोपियों को पकडा था। 

इन्हें किया गिरफ्तार 

पुलिस ने दबिश के दौरान सफदर पिता जहरुल नागोरी, हाफिज पिता ताजउददीन जामिया, आमिल पिता काजी सैफुददीन, शिवली पिता अब्दुल, कमरुददीन पिता चांद मोहम्मद, शादुली पिता अब्दुल, यासीन पिता अब्दुल, कामरान पिता हाजी शाहीद, अंसार पिता अब्दुल, मुनरोज पिता कुतुबुददीन, शर्मी पिता दादेश, खालिद पिता मोहम्मद सलीम, अहमद पिता खाजा, शहजाद पिता बादुल्ला, नफसेर पिता शहजाद को गिरफ्तार किया गया था। तथा सभी के खिलाफ विभिन्न धारा में प्रकरण दर्ज किया गया था, पुलिस ने कार्रवाई के दौरान पिस्टल, कारतूस, सिमी प्रशिक्षण शिविर का ट्रेनिंग प्रोग्राम, मानचिञ, रेल की समय सारणी, कुछ किताबे सहित अन्य सामान को जप्त किया था। 


सीएम ने किया सम्मानित 

2008 में ब्लास्ट के बाद सफदर नागौरी सहित कुछ साथियों ने गुजरात को छोड़ मप्र में छीप गए थे। उनके पीथमपुर में छिपे होने की सूचना के बाद कार्रवाई धार पुलिस ने की थी। सिमी आतंकवादियों को गिरफ्तार करने पर धार पुलिस के तत्कालीन एएसपी बीरेन्द्रसिंह को 2010 में गेलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उन्हें रिवाल्वर भेंट की थी। इस कार्रवाई के दौरान पीथमपुर सीएसपी सुनील मेहता की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वीरेन्द्रसिंह वर्तमान में सिंगरोली एसपी है। 

विरोध करने पर केस हुआ था ट्रांसफर 

सिमी आतंकवादियों का प्रकरण सबसे पहले धार में चला, वर्ष 2009 में विरोध शुरु हुआ था। तब भाजपा के युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष वर्तमान में भाजपा के जिला अध्यक्ष राजीव यादव ने अपनी टीम के साथ विरोध दर्ज करवाया था। युवा मोर्चा अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने कोर्ट में पैरवी करने पर आतंकवादी के अधिवक्ता की कोर्ट परिसर के बाहर आतंकवाद मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए पिटाई कर दी थी। उसका असर केस ट्रांसफर के रूप में सामने आया। इसके बाद केस इंदौर पहुंचा, जहां से सजा व उसके बाद कोर्ट में सुनवाई हुई। 



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