मौसम के कारण अमरूद व अन्य फलों की पैदावार कम , किसानों को नहीं मिल रहे सही दाम

 आशीष यादव धार

किसान को नही मिल रहे दाम किसान परेशान 

कोरोना काल में अमरूद व अन्य उत्पादक किसानों का हो रहा नुकसान, मूल पूंजी का भी निकालना हो रहा मुश्किल

जहा मौसम से पहले ही किसान परेशान है वही दूसरी ओर फलो के दाम नही मिलने से भी परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है पहले ही किसान परेशान था वही दूसरी ओर फिर किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। उन्हें बेचने के लिए सही बाजार नही मिल रहा है। वहीं बाहरी खरीदार भी नही आ रहे है। जिससे अमरूद की खेती में मुनाफा नही हो पाया है। वही जिले के अन्य इलाके में बहुतायत अमरूद की बागीचे लगाये गये है। किसानों के मेहनत का फल पककर तैयार है, लेकिन इसे बाजार भाव नहीं मिल पा रहा है। अमरूद के बगीचे लगाने वाले किसानों को मानें तो पहले कोरोना ओर अब फिर से बाजार में बीमारी के कारण अमरूद की मिठास फीकी कर दी है।

इस समय सहित अन्य इलाके से व्यापारी अमरूद खरीदने आते-जाते है। लेकिन इस बार कोई भी व्यापारी अभी तक नहीं आये है। किसान बताते है कि इस समय में व्यापारियों के जमावड़ा लगता था। लेकिन कोरोना के चलते दिल्ली जैसी अंतरराष्ट्रीय मंडियों में माल का बहारी देशो में नही जा ने से भाव नही मिल पा रहा है जिससे बिक्री पर भी इसका असर पड़ा है।इस समय अमरूद की काफी बिक्री होती थी। इस बार नहीं हो रही है बाहर से व्यापारी नहीं आ रहे है। इस लिए लोकल मार्केट का सहारा है। या भी 10 से 15 रुपये प्रति किलो थोक भाव में बिक रहा है। इस किसान बता रहे है कि इस बार लाभ तो छोड़ दो, मुल पूंजी भी निकल जाए तो बड़ी बात होगी

भाव नही होने से किसान परेशान: 

अमरूद की हजारों किसान बगीचे की खेती करते है। मगर अमरूद के भाव से किसान परेशान है। किसानों को कोरोना संक्रमण के कारण उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। इससे इन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।अमरूदों की बम्पर पैदावार ने जहां पहले ही भावों को अर्स से फर्श पर ला दिया था। वहीं गत पखवाड़े में बिगड़े मौसम से वातावरण में बढ़ी अतिरिक्त नमी ने बागवानों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ठण्ड व नमी के चलते गीला हुआ अमरुद जल्द पक गया। इससे फल मण्डी में व्यापारी पके अमरुद को लेने में हिचकिचा रहे है। इससे बागवानों को और कम दामों पर अपनी मेहनत को तोलना पड़ रहा है। फल मण्डी में बागवानों को औसत 10 से 15 रुपए किलो की दरों से अमरुद बेचना पड़ रहा है। गत वर्ष मण्डी में औसतन 40से50 रुपए किलो व हाइब्रिड के भाव 80 से 100 के भाव से अमरूद बिका था। किसानों को अमरूदों के दाम पिछले साल से भी कम मिल रहे है। वही कोरोना के कारण 45 रुपए ही बिका

इन शहरों तक आपूर्ति

मध्यप्रदेश राजस्थान सहित दिल्ली, पंजाब चण्डीगढ़, जयपुर, आदि बड़े शहरों में अमरूदों जाता है। जिले से प्रतिदिन करीब एक दर्जन से अधिक अमरूद आस-पास के गांवों से जयपुर, दिल्ली सहित अन्य राज्यों की मण्डियों में पहुंच रहा है। मगर दिल्ली जैसे अन्तराष्ट्रीय मंडियों से माल नही उठने के कारण भी भाव नही मिल रहा व दूसरी ओर कोरोनो के बढ़ते मरीजो के चलते भी भाव नही मिल रहे है। जिससे किसानों को उद्यानिकी फसलो में नुकशान उठाना पड़ रहा है

ये बोले अमरूद किसान

इस सीजन में भी अमरूदों व अन्य फलों के सही दाम नहीं मिल रहे है। इन दिनों अमरूद मण्डी में 10से 15 रुपए किलो ही अमरूद मिल रहे है। पिछले साल इस सीजन में सही दाम नही मिले थे।मगर इस बार कोरोना के चलते इस बार हम किसानों को दाम नही मिल पाए है हमे काफी नुकशान उठाना पड़ा।वही इस बार अमरुद हमे युही फेकना पड़े। ~मनोज बोरदिया, किसान, तोरनोद

बगीचे के पैसे ही नही निकले

इस बारे में जो अमरूद का बगीचा खरीदा उसके व अमरुद के दाम पिछले साल की तुलना में भी कम मिल रहे है। इससे हमे भी परेशानी हो रही है। जहाँ इस महामारी के चलते लागत भी निकाल सके वही वातावरण में नमी के कारण फल पकाव होने से दामों गिरावट आई है। इस कारोबार में नुकसान हुआ। ~सादिक बागवान


साल दर साल बढ़ रहा कारोबार

वर्ष                  हेक्टियर            उत्पादनमेट्रिक

2015-16      156 हेक्टिय               1921    

2016-17      264.5 हेक्टियर           2910

2017-18       2287हेक्टियर            57175

2018-19       2657हेक्टियर            66425

2019-21     1031 हेक्टियर।            71952 

2021-22।    1594                         33936 


फैक्ट फाइल

जिले में 2 हजार से अधिक किसान क्षेत्र में अमरूदों के बगीचे की खेती करते है।

इस वर्ष 33 हजार मेट्रिक हैक्टेयर में हुआ उत्पादन

नीरज साँवलिया, उपसंचालक उद्यानिकी, धार ने बताया कि कोरोना के कारण अमरूद को लेकर नई वेराटी में किसानों का रुझान है। वही मौसमों के कारण मूल्य में उतार चढ़ाव आते रहते है 




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