अम्बेडकर विश्वविद्यालय द्वारा "बौद्ध दर्शन- चार वैज्ञानिक आर्य सत्य" विषय पर आनलाईन का आयोजन

  डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय डॉ अम्बेडकर नगर; महू, इंदौर में  डॉ अम्बेडकर विचार एवं दर्शन अध्ययनशाला के द्वारा लार्ड बुद्धा चेयर के अन्तर्गत दिनांकरू  25 जून  2021 को ’बौद्ध दर्शन- चार वैज्ञानिक आर्य सत्य विषय पर आनलाईन मेमोरियल लेक्चर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मनीषा सक्सेना अधिष्ठाता ने किया। कार्यक्रम के सह.अध्यक्ष प्रो. डी के वर्मा एवं मुख्य वक्ता के रूप में प्रो किशोर गायकवाड, मुम्बई विश्वविद्यालयए मुम्बई रहे। 

कार्यकम संयोजक डॉ कौशलेन्द्र वर्मा ने मेमोरियल लेक्चर का परिचय दिया और कहा कि चार वैज्ञानिक आर्य सत्य बौद्ध धर्म का सार है। उनके सम्पूर्ण दार्शनिक सिद्धांत  किसी न किसी रूप में इन चार आर्य सत्यों से निःसृत हुए हैं। इनमें सम्पूर्ण मानवता के लिए दुख निवारण के मार्ग प्रशस्त किये गये हैं। प्रो डी के वर्मा अधिष्ठाता ने स्वागत वक्तव्य देते हुए बुद्ध के आर्य सत्य पर विशेष प्रकाश डाला और कहा कि बौद्ध दर्शन वैज्ञानिक एवं मानवता का धर्म है और वह मनुष्य के दुख.मुक्ति के सम्यक पथ अपनाने का संदेश देता है। इसमें अष्टांगिक मार्ग, मानवीय नैतिक मूल्य और पंचशील को जीवन की उत्कृष्टता पर विशेष बल दिया है।  

मुख्य वक्ता प्रो किशोर गायकवाड, मुम्बई विश्वविद्यालयए ने अपने वक्तव्य में कहा कि मनुष्य के जीवन में चार वैज्ञानिक आर्य सत्यों के साथ ही साथ मैत्री, करूणा और विपश्यना का विशेष महत्व है। उन्होंने  मानव कल्याण के लिए दुखोन्मुक्ति के पथ और मध्यमार्ग का अनुसरण करने पर बल दिया। वर्तमान समय में सामाजिक समरसता की स्थापना के लिए प्रत्येक जनमानस को बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग और पंचशील का सिद्धांत को आत्मसात करना चाहिए। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ मनीषा सक्सेना अधिष्ठाता ने अपने उद्बोधन में कहा कि बौद्ध दर्शन के आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग में दुःख मुक्ति के साधन बताये गये हैं । आर्य सत्यों में दुःखों का मूल कारण तृष्णा है, इसी कारण मनुष्य में निराशा और दुःख उत्पन्न होते है.  इस कारण हम सब विपश्यना के माध्यम से दुःखों को दूर कर सकते है। 

मेमोरियल लेक्चर कार्यकम का धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव अजय वर्मा ने दिया और कार्यक्रम संचालन संयोजक डॉ कौशलेन्द्र वर्मा ने किया।