पेट्रोल डीजल पर इतनी हाय तौबा, उससे भी जरूरी हैं देश में कई मुद्दे

 आइए समझते हैं इस पूरी इकोनॉमिक्स और पेट्रोल डीजल कीमतों के बीच मजबूत होती भारत की सुरक्षा व्यवस्था को.

शुरुआत पेट्रोल के दामों से करते हैं. यहां हम आपको बता दें कि आज जितने दाम पेट्रोल के हैं, उससे थोड़े से कम 2013 में भी हो चुके हैं. उस समय की विपक्षी पार्टी बीजेपी ने भी इसे लेकर आंदोलन किए थे तो आज के विपक्ष को भी पूरा हक है विरोध जताने का, शायद इसे ही लोकतंत्र कहते हैं.

पर एक बात और याद कीजिए कि यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री से जब रफाल या अन्य सैन्य जरूरतों के सामान के बारे में सवाल पूछा जाता था तो रक्षा मंत्री का जवाब होता था कि देश के पास पैसे नहीं हैं. अब हम यह नहीं पूछेंगे कि उस समय पैसा जाता कहा था क्योंकि यह सवाल पूछते ही नक्सली सोच वाले हमारे चैनल को गोदी मीडिया की उपाधियां उपाधि देने में जरा भी पीछे नहीं रहेंगे. 



इसलिए एक निष्पक्ष मीडिया घटक होने के नाते हम आपको यह बताना ज्यादा पसंद करेंगे कि दुनिया की सबसे अच्छी रक्षा व युद्ध में प्रयोग होने वाले सिस्टम भारत पिछले कुछ वर्षों में लगातार खरीद रहा है. कुछ लोग जिन्हें सिर्फ मोदी का विरोध करना है, वही यह कह रहे हैं कि इससे पहले पेट्रोल ने कभी Rs 100 का बेंचमार्क नहीं छुआ.

हां यह सही भी है. वह सही कह रहे हैं और हम उनकी इस बात को मानते हैं कि ऐसा कभी नहीं हुआ है पर पेट्रोल प्राइस के अलावा भी ऐसी कई चीजें हैं जो भारत में इससे पहले कभी नहीं देखी, कांग्रेस शासन तो छोड़ो अटल जी की सरकार में भी नहीं.

1. क्या इससे पहले पाकिस्तान को बिना एक गोली चलाई भुखमरी के कगार पर जाते देखा गया, 

2. क्या पाकिस्तान के अंदर घुसकर दुश्मन को धूल चटादी भारतीय सेना के नजारे किसी ने देखे हैं,

3. आतंकवादी हमले तो बहुत हुए पर क्या बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक किसी ने देखी है 

4. याद होगा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी आने के एक पखवाड़े पहले से ही रेडियो और टीवी पर इस तरह के इस इश्तिहार देखने को मिलते थे कि देश पर आतंकी हमला हो सकता है, किसी लावारिस वस्तु को हाथ न लगाएं वगैरा-वगैरा पर पिछले 6 साल में आपने एक बार भी ऐसा कोई इश्तिहार देखा है, 

5. क्या भारतीय पीएम को इतने सारे देशों द्वारा सर्वोच्च सम्मान देते किसी ने देखा है, 

6. क्या चीन जैसे घोर विस्तारवादी देश को डोकलाम और लद्दाख जैसे सामरिक इलाकों से वापस होते हैं किसी ने देखा है,

7. क्या दिल्ली में बिरयानी खाने वाले और भारत को ललकIरने वाले कश्मीरी अलगाववादियों को मेमेंआते देखा है,

8. क्या दुनिया के सबसे संपन्न देशों को भारत के सामने हाथ फैलाते देखा है. याद कीजिए कोरोना वैक्सीन के बारे में आप सब ने देखा होगा कि किस तरह से बड़े-बड़े संपन्न देश भारत से गुजारिश कर रहे थे कि उन्हें कोरोना वैक्सीन चाहिए और यह सिलसिला आज भी जारी है,

9. क्या उन इलाकों पर सड़कें और हवाई पट्टी बनते देखा है जहां पर जरा सी भी हलचल होने पर चीन गुर्राने लगता था और उसके गुर्राते ही भारतीय नेतृत्व बैकफुट पर आ जाता था. पर आज बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन दिन-रात लगा है तो सिर्फ बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में क्योंकि एक मजबूत नेतृत उसके पीछे खड़ा है,

यह तो महज थोड़ी सी बातें हैं जिनका जिक यहां पर हुआ है. ऐसी सैकड़ों बातें हैं जिनके कारण हम फक्र कर सकते हैं वर्तमान नेतृत्व पर.

ऐसा बहुत कुछ हुआ है जो इससे पहले इस देश में कभी नहीं हुआ इसलिए इन वामपंथियों के रुदाली वाले रोल के कारण आप विचलित ना हो और खड़े रहे हैं अपने नेतृत्व के साथ.

एक बात का ध्यान बस रखें कि पेट्रोल-डीजल के अलावा बाकी सारी चीजें सस्ती हुई हैं और एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि वे सारी ताकतें जो सीएए वाले आंदोलन में थी, नकली किसान वाले आंदोलन में हैं, कश्मीर के 370 के विरोध में थी और वह सारे काम जो अब तक हुए हैं उनके विरोध में थी, वही ताकतें आज पेट्रोल-डीजल को लेकर इस तरह का रोना मचा रही है.

हमें इन सब चीजों में सावधान रहना है और जब भी मौका लगे, जहां भी मौका लगे, इस तरह के लोगों का विरोध करना है और उन्हें असलियत बतान है कि जिससे  आम आदमी को भी गुमराह न कर सकें