तेज ध्वनि व चकाचौंध रोशनी में नाच-गाने का जुनून धकेल रहा बीमारियों की ओर कार्यक्रम छोटा हो या बड़ा, डीजे साउंड का चलन तेजी से बढ़ने लगा है

कार्यक्रम छोटा हो या बड़ा, डीजे साउंड का चलन तेजी से बढ़ने लगा है। नगरों के साथ अब ग्रामीण अंचल में भी डीजे पर नाच-गाने की मस्ती परवान चढ़ने लगी है। तेज ध्वनि के साथ चकाचौंध रोशनी में बजने वाले ये डीजे स्वास्थ्य के लिए कितने हानिकारक हो सकते हैं, इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। बस मस्ती व नाचने में हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि इसके विपरीत व घातक परिणामों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कानों में सुनने की शक्ति कम होना, दिल की धड़कनें बढ़ना आदि बीमारियों की गिरफ्त में हम शनैः-शनैः बढ़ रहे हैं।


स्वास्थ्य पर धीमा प्रहार.... कुछ देर की मौज-मस्ती में डीजे के शौर के विपरीत व घातक परिणामों से बने अनजान


नगर सहित अंचल में इन दिनों डीजे वाहनों की संख्या बढ़ी है। लैटेस्ट साउंड सिस्टम पर रीमिक्स गानों की धूम मची है। डीजे हर आयोजन में लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। डीजे के लिए लोगों का क्रेज भी ऐसा है कि छोटे कार्यक्रम में भी इसे लगाया जा रहा है। बदलते ट्रेंड के साथ अब डीजे सिस्टम में भी बदलाव आ चुका है। इसके चलते शहरों की तर्ज पर डीजे सिस्टम ग्रामीण अंचल में बज रहे हैं। इसमें डिफरेंट एंगल के स्पीकर्स खास हैं, जो तेज गति से साउंड निकालते हैं।


मानसिक तनाव का बन रहा सबब


पहले से ही सड़क पर हर रोज दौड़ रहे सैकड़ों भारी वाहनों के साथ बाइकों में प्रेशर हॉर्न के साथ तेज गति के साइलेंसर लोगों का मानसिक तनाव बढ़ा रहे हैं। अब रही-सही कमी डीजे सिस्टम के शौकीन पूरा कर रहे हैं। डीजे से निकलने वाला कानफोडू शोर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में खलल तो डाल ही रहा है, लोगों की सुनने की शक्ति पर भी कहर ढा रहा है। इससे लोगों में बहरेपन की शिकायत बढ़ रही है। किसी खास मौके पर डीजे की धुन में थिरकना हर किसी को अच्छा लगता है, लेकिन कान के सुनने की क्षमता को दरकिनार कर इस शोर के बीच घंटों बिताने का यह ट्रेंड सेहत के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है। तत्कालीन असर नजर नहीं आने से नाचने व सुनने वाले अंजान बने हुए हैं।


शादियों में पहली पसंद बना डीजे


पहले कुछ खास मौकों पर ही डीजे का सेटअप लगता था। अब हर कार्यक्रम में यह पहली पसंद बना गया है। इसमें फिल्मी गानों के ट्रेंड में अब आदिवासी रिमिक्स गाने शामिल हो चुके हैं। हर वर्ग को पसंद आने वाले आदिवासी रिमिक्स गानों की बीट्स सभी को थिरकने पर मजबूर कर देती है। इन गानों पर युवक-युवतियां अपनी स्टाइल में नाचते हैं। पहले सामान्य हेलोजन की एक या दो लाइट लगती थी, अब टेक्नोलॉजी के साथ लैटेस्ट शारपी लाइट, एलईडी, फॉग मशीन का यूज हो रहा है, जो आंखों पर प्रभाव डालती है। लोगो ने कानफोड़ू डीजे पर रोक की मांग की है। 


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