रक्षाबंधन की तिथि ,भद्रा को लेकर भ्रमित न हो 11 अगस्त को ही मनाई जाएगी रक्षाबंधन एवं श्रावणी पर्व-डाॅ. अशोक शास्त्री

आशीष यादव, धार 

रक्षाबंधन पर्व श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है ।  यह त्योहार बहनों एवं भाईयों के प्रेम का प्रतिक है । इस दिन बहनें अपने भाईयों की सुख समृद्धि के लिए उनकी कलाई पर रंग बिरंगी राखियां बांधती है , तो वहीं भाई बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते है । कुछ हिस्सों पर यह राखरी के नाम भी जाना जाता है । यह हिंदुओं के सबसे बडे त्योहार मे से एक है । इस दिन ब्राह्मण समाज श्रावणी पर्व बडे उत्साह से मनाते है । इस दिन विप्र वर्ग बडे विधि विधान से यज्ञोपवित बदलकर नई जनोई बदलते है ।

इस संदर्भ मे मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री ने विस्तृत से बताया कि रक्षाबंधन श्रावणी उपाकर्म 11 अगस्त गुरुवार को ही शास्त्र सम्मत है । रक्षाबंधन श्रावणी उपाकर्म को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है । यह विडंबना है कि हिंदू धर्म में कई पर्वों को लेकर एकरूपता देखने को नहीं मिलती पूरा भारत वर्ष एक दिन पर्व मनाता है एवं एक क्षेत्र विशेष के लोग अगले दिन पर्व मनाते हैं। हिंदू धर्म की रक्षा हेतु हम सभी को एक मत होना होगा अलग-अलग दिन पर्व मनाने से हिंदू समाज विखंडित हो रहा है। हिंदू धर्म की रक्षा एवं अखंडता हेतु विद्वानों का कर्तव्य होता है कि हम एकमत होकर धर्म की रक्षा करें। हिंदू पर्वों पर एकमत होकर उत्सव मनाएं । 

डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक रक्षाबंधन तिथि 11 अगस्त ही निर्धारित है। इसके अतिरिक्त *यदि हम धर्म ग्रंथों  1–धर्मसिंधु, 2–निर्णय सिंधु 3–पीयूष धारा 4–मुहूर्त चिंतामणि इत्यादि का अध्ययन करने पर इस परिणाम पर पहुंचेंगे कि 11 अगस्त 2022 को ही रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म पर्व एवं संस्कृत दिवस शास्त्र सम्मत है ।

 डाॅ. शास्त्री के अनुसार रक्षाबंधन एवं श्रावणी उपाकर्म में मुख्यतः पूर्णिमा तिथि एवं श्रवण नक्षत्र का होना आवश्यक माना गया है । इस वर्ष 11अगस्त को प्रातः10 : 33 मिनट से पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ हो रही है जो पूरे दिन व्याप्त है जबकि श्रवण नक्षत्र प्रातः 6:48 से प्रारंभ हो जाएगा। कई जातकों का इसमें प्रश्न है कि उत्तराषाढ़ा युक्त श्रवण नक्षत्र में उपा कर्म रक्षाबंधन नहीं करना चाहिए उत्तराषाढ़ा नक्षत्र दो मुहूर्त यदि हो तो उसका दुष्प्रभाव होता है परंतु रक्षाबंधन के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र केवल 5 मिनट तक रहेगा जबकि एक मुहूर्त 24 मिनट का होता है यह तथ्य भी यहां पर लागू नहीं होता है । इसके अतिरिक्त धर्मसिंधु में कहा गया है यजुर्वेदियों के लिए नक्षत्र की प्रधानता नहीं अपितु तिथि की प्रधानता देखी जाती है और पूर्णिमा 11 अगस्त को व्याप्त है एवं 12 अगस्त को पूर्णिमा तीन मुहूर्त नहीं होने के कारण रक्षाबंधन ,उपाकर्म संस्कार मनाना शास्त्र सम्मत नहीं है ।

डाॅ. अशोक शास्त्री ने आगे बताया कि 12 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना क्यों शास्त्र सम्मत नहीं है ?

1– क्योंकि 12 अगस्त को पूर्णिमा प्रातः 7:01 पर समाप्त हो जाएगी जोकि सूर्योदय के बाद 13 मिनट ही होते हैं जो कि एक मुहूर्त से भी कम है ।

2– निर्णय व धर्म सिंधु ग्रन्थों के अनुसार भाद्रपद युक्त प्रतिपदा व धनिष्ठा युक्त नक्षत्र में श्रावणी उपाकर्म (जनेऊ धारण) करना शास्त्रों में निषेध माना गया है ।

3– 11 अगस्त को पूरे दिन भद्रा व्याप्त है परंतु भद्रा मकर राशि मे होने से इसका वास पाताल लोक में माना गया है ।

 

स्वर्गे भद्रा शुभं कुर्यात पाताले च धनागम।

मृत्युलोक स्थिता भद्रा सर्व कार्य विनाशनी 

जब भद्रा स्वर्ग या पाताल लोक में होती है तब वह शुभ फल प्रदान करने में समर्थ होती है।

मुहूर्त मार्तण्ड में भी कहा गया है स्थिताभूर्लोख़्या भद्रा सदात्याज्या स्वर्गपातालगा शुभा”।


11 अगस्त की पूर्णिमा को चंद्र मकर राशि मे दिनभर भ्रमण करेंगे । चंद्रमा के मकर राशि मे होने से भद्रा का वास पाताल लोक मे रहेगा । पाताल लोक मे भद्रा वास होने से यह शुभ फलदायक रहेगी । इसलिए पुरे दिन सभी लोग अपनी सुविधानुसार अच्छे चौघड़िए और होरा के अनुसार राखी बांधकर त्यौहार मना सकते है । 

डाॅ. शास्त्री ने बताया कि मुहूर्त चिन्तामणि के अनुसार जब चंद्रमा कर्क , सिंह , कुंभ , एवं मीन राशि मे भद्रा का वास प्रथ्वी पर होता है । चंद्रमा जब मेष , वृषभ , मिथुन एवं वृश्चिक मे रहता है तब भद्रा का वास स्वर्गलोक मे रहता है । कन्या , तुला , धन , एवं मकर राशि मे चंद्रमा होने पर भद्रा पाताल लोक मे रहती है । भद्रा जिस लोक मे रहती है वही प्रभावी रहती है । इस प्रकार जब चंद्रमा कर्क , सिंह , कुंभ एवं मीन मे होगा जब भद्रा का वास होगा तभी वह प्रथ्वी ( मृत्युलोक ) पर असर करेगी अन्यथा नही । जब भद्रा स्वर्ग या पाताल लोक मे होगी तब वह शुभ फलदायक कहलाएगी । आमजनों को किसी भी अफवाह और आधी अधूरी जानकारी से भ्रमित न हो एवं पूर्ण उल्लास और आनंद के साथ संपूर्ण दिन रक्षाबंधन पर्व मनाएं । 




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