अमृत महोत्सव के तहत 75 कार्यक्रम होंगे, 37 का आयोजन कर डॉ. अंबेडकर विश्वविद्यालय ने बनाया कीर्तिमान

 महू। स्वाधीनता की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर पूरा देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। डॉ. अम्बेडकर के पंच तीर्थ महू की जन्म स्थली पर स्थापित डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत 75 कार्यक्रमों की श्रंखला तैयार की तथा उनके 37 कार्यक्रमों का सफल आयोजन कर मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कीर्तिमान स्थापित किया है. वर्तमान में प्रथम सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय में डॉ. अम्बेडकर के अकादमिक एवं बौद्धिक चिंतन पर केन्द्रित सामाजिक समरसता और राष्ट्र उत्थान के लिए अध्ययन-अध्यापन एवं शोध प्रसार की गतिविधियों सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत हुए आयोजनों पर चर्चा करते हुए विश्वविद्यालय के मीडिया प्रमुख प्रो. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला के कुशल नेतृत्व में मई 2021 से आजादी का अमृत महोत्सव के सम्पूर्ण वर्ष के कार्यक्रम की श्रंखला का शुभारम्भ हुआ। इनमें राष्ट्रीय साप्ताहिक व्याख्यानमाला के 75 एवं राष्ट्रीय वेबिनार के 6 कार्यक्रमों का आयोजन तय किया गया है। इस कड़ी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय त्रैमासिक कैलेंडर के अंतर्गत अभी तक 35 राष्ट्रीय व्याख्यान एवं 2 राष्ट्रीय बेबीनार आयोजित किये जा चुके हैं। आगामी कार्यक्रम निरंतरता में जारी हैं। आयोजित हुए कार्यक्रमों में ‘भारतीय इतिहास की समस्याएंः चौरी-चौरा पुनरावलोकन, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नवीन परिप्रेक्ष्य: ग्रामीण बिहार प्रतिबिम्ब, 1857 के आंदोलन में हरियाणा का योगदान, 1940-50 के दशक का भारतीय स्वतंत्रता परिदृश्य, सुभाष  चंद्र  बोस, अंगप्रदेश में स्वतन्त्रता आंदोलन, प्रथम  स्वतंत्रता संग्राम में फतह बहादुर  शाही एवं  सन्यासी विद्रोह, मध्य  भारत  के  भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानी, बुन्देलखण्ड के वीर सेनानियों का योगदान, वासुदेव बलवंत फड़के: आद्य क्रांतिकारी, डॉ. भीमराव अंबेडकर: एक राष्ट्रनेता, स्वाधीनता संग्राम की गाथा: धार एवं माण्डु रियासत, बाबू जगजीवन राम के राष्ट्रीय चिंतन में गाँव, गरीब और किसान, वीर सेनानी श्री आत्मप्रकाश: आका सूफी, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, झारखण्ड के आदिवासी सेनानी, जननायक टंट्या भील की युद्धनीति, चुनौतियाँ और जीवन-दर्शन, प्रखर देशभक्त श्यामजी कृष्ण वर्मा का स्वाधीनता संग्राम में योगदान, राष्ट्रनिर्माता पं. मदन मोहन मालवीय: आत्मनिर्भर भारत, ताना भगत आंदोलन, भारतीय स्वाधीनता आंदोलन: मेरठ परिदृश्य, राष्ट्र भक्त : स्वामी विवेकानंद समेत स्वाधीनता आन्दोलन से जुड़ी विभूतियों एवं स्थानों पर विषय केन्द्रित रहे।
महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति जी द्वारा निरंतर दिशाबोध प्रदान किया जाना शिक्षा के जरिये राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए दूरगामी दृष्टि है। इन कार्यक्रमों में मणिपुर की राज्यपाल डॉ. नजमा हेपतुल्ला, बिहार विधान परिषद् के सदस्य, डॉ. संजय पासवान भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के प्रो. कुमार रत्नम, मध्य प्रदेश राज्य सभा सांसद रघुनन्दन शर्मा, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सदस्य प्रो. दीनबंधु पांडेय सहित कई विद्वान शामिल हुए।  
भारतीय स्वाधीनता के नायकों और उनके दिखाये गए रास्तों पर वैचारिक चिंतन सकारात्मक संभावनाओं की ओर बढ़ने की प्रेरणा इन कार्यक्रमों से मिल रही है। कार्यक्रमों में दिए गए उद्बोधन और आलेखों का दस्तावेजीकरण भी किया जा रहा है। इसका प्रकाशन विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। विद्वानों के अकादमिक सहयोग से चलने वाले राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान, वेबीनार के जरिये उन राष्ट्रवीरों को भी याद किया जा रहा है जिनके संघर्ष और राष्ट्रीय सरोकारों को अभी तक व्यापक स्तर पर लाया नहीं जा सका।
विश्वविद्यालय द्वारा सामाजिक भूमिका एवं उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए कोरोनाकाल में गाँव और समाज का संरक्षण भी किया गया सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत मध्य प्रदेश के कोविड अस्पतालों में योग प्रशिक्षण शिविर भी लगाये गए जिसके अंतर्गत कोरोना पीड़ितों को योग कराया गया। विश्वविद्यालय निरंतर प्रयास कर रहा है कि विद्यार्थियों को समाज, राष्ट्र और विश्व जगत के समक्ष जागृत, चिंतनशील, उत्तरदायी तथा समर्पित नागरिक के रूप में तैयार किया जा सके जो मध्यप्रदेश सहित देश का गौरव बने। आजादी का अमृत महोत्सव श्रृंखला का उद्देश्य जनमानस को अपने इतिहास और इतिहास को गढ़ने वाले नायकों के बारे जागरूक करना रहा है। विश्वविद्यालय में डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक समता और राष्ट्र उत्थान  के विचारों को क्रिया व्यवहार में लाने के लिए स्वाधीनता सेनानियों पर केन्द्रित कार्यक्रमों का लोकव्यापीकरण का कार्य किया जा रहा है।