7वें अंतर्राष्ट्ररीय योगा दिवस के अवसर पर बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा वेबीनार का आयोजन


महू (इंदौर). ‘कृतज्ञ होना जीवन में खुश होने की चाबी है और खुश होने से सफलता के रास्ते खुलते हैं. मनुष्य वर्तमान समय में अवसाद और परेशानियों से घिरा हुआ है लेकिन उसे रास्ता समझ नहीं आ रहा है कि वह स्वयं को खुश कैसे रखे.’ ग्रेट्युट क्लब के श्री रवि उत्तमानी और श्री अंकित लोढ़ा 7वें अंतर्राष्ट्ररीय योगा दिवस के अवसर पर आयोजित वेबीनार को संबोधित कर रहे थे. इस वेबीनार का आयोजन बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा किया गया था.
ग्रेटीट्युट क्लब की शुरूआत और अपने जीवन के अनुभव सुनाते हुए श्री उत्तमानी ने कहा कि व्यवसाय में जुड़ जाने के बाद उसमें ही इतना डूब गए कि जीवन में खुशी क्या है, यह तलाश करने निकलना पड़ा. लगातार काम के कारण परिवार और प्रियजनों को समय नहीं दे पाने के कारण रिश्ते खराब होने लगे. ऐसे में स्वयं की जिंदगी को संवारने का पहला खयाल मन में आया और ग्रेट्युटी क्लब की ओर बढ़े. इसकी शुरूआत स्वयं से की और परिवार की तरफ बढ़े और आज 6 हजार से अधिक लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं. ग्रेटीट्युटी क्लब के श्री लोढ़ा का अनुभव भी इसी तरह का था लेकिन ग्रेट्युट क्लब शुरू करने के साथ अब उन्हें अपने जीवन की सार्थकता समझ आने लगी है. दोनों वक्ताओं ने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि लोगों के जीवन में सकरात्मका लाने और अवसाद से मुक्त करने में उनका प्रयास सफल रहा है.
ग्रेट्टीट्यूट का अर्थ स्पष्ट करते हुए श्री उत्तमानी ने कहा कि जीवन में जिससे जो मिला, उसके प्रति हमारे मन में आभारी होना चाहिए. वह परिवार हो, दोस्त हो या प्रकृत्ति, ये सब हमको देते हैं. हम जब दूसरों के प्रति कृतज्ञ होते हैं तो स्वयं में सकरात्मक बदलाव आता है और यही हमें जीवन की सच्ची खुशी प्रदान करता है. श्री लोढ़ा ने इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लव ऑफ अट्रेक्शन का अर्थ स्वयं से प्यार करना है. हम अधिकांश समय असुरक्षा की भावना से घिरे होते हैं और बिना किसी कारण स्वयं को सुरक्षा घेरे में कैद कर लेते हैं. जैसा हम सोचते हैं, वैसा हम बनते हैं. दोनों वक्ताओं का कहना था कि सोच से आदत बनती है और आदत से व्यक्तित्व बनता है. ब्रम्हांड से हमें वही मिलता है, जिसकी कामना हमारे मन में होती है. वक्ताओं का कहना था कि जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है कि हम हमेशा सकरात्मक बनें.  
वेबीनार की अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने अपने  उद्बोधन में विषय के बारे में जानकारी दी और वक्ताओं के बारे में बताया कि ये लोग लोगें का जीवन में सकरात्क परिवर्तन लाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं. कुलपति प्रो. शुक्ला ने कहा कि ये लोग जिस परिवार और परिवेश से आते हैं, वहां इनका भौतिक जीवन सुखमय था लेकिन भीतर के एकाकीपन को महसूस किया और खुशी की तलाश में निकल पड़े. आज स्वयं के साथ हजारों लोगों को जीवन का अर्थ बताने में सफल हो रहे हैं. कुलपति महोदय ने वक्ताओं से कहा कि सामाजिक विज्ञान के विश्वविद्यालय में इन विषयों की जरूरत है और प्रतिमाह एक व्याख्यान देने के लिए वक्ताओं को न्यौता दिया. वेबीनार का समन्वय एवं अवधारणा डॉ. अजय दुबे ने किया. इस वेबीनार को सफल बनाने में रजिस्ट्रार श्री अजय वर्मा तथा नेक एवं मीडिया सलाहकार डॉ. सुरेन्द्र पाठक के साथ विश्वविद्यालय परिवार का सक्रिय सहयोग रहा.