पशुचिकित्सा महाविद्यालय में मनाया गया विश्व जल दिवस


महू। 2000 वर्षों पहले हमारी जनसंख्या आज की जनसंख्या से मात्र 5% थी तब भी उतना ही जल पृथ्वी पर मौजूद था, जितना आज है । लिहाजा जल संकट की विभिषिका का अंदाज लगाना बड़ा मुश्किल है। विश्व की एक तिहाई जनसंख्या हेतु पर्याप्त पेयजल भी उपलब्ध नहीं है। उक्त वक्तव्य प्रसिद्ध भूगर्भ शास्त्री एवं राष्ट्रीय पेयजल सुरक्षा परिषद के पूर्व नोडल अधिकारी श्री सुरेंद्र मोहन शर्मा ने पशुचिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित विश्व जल दिवस पर आयोजित वेबिनार में देते हुए कहा कि एक किलो गेहूं पैदा करने में 900 लीटर, एक किलो सब्जी उगाने में 500 लीटर तथा 1एक किलो मांस उत्पादन करने में 10000 लीटर पानी की खपत होती है। जाहिर है, कि हमें पानी का उपयोग संभल संभल के करना होगा। 

 नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ एसपी तिवारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस वेबिनार कार्यक्रम का उद्घाटन अधिष्ठाता डॉ मुकेश मेहता ने करते हुए कहा कि विश्व वर्तमान में एक भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है और ऐसी दशा में इस तरह के आयोजन सार्थक प्रयास है। 

 कार्यक्रम संयोजक डॉ संदीप नानावटी ने विश्व जल दिवस की विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल की आवश्यकता हमारे दैनिक जीवन में इतनी अधिक हो गई है कि कृषि व पशुपालन हेतु आवश्यक जल की मात्रा में बेहद कमी आई है। 

प्रारंभ में अतिथियों का परिचय दिया, डॉ निधि श्रीवास्तव ने। कार्यक्रम का संचालन किया, डॉक्टर राकेश शारदा ने व आभार प्रदर्शन डॉ विपिन गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में 130 छात्र और प्राध्यापक उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन कॉलेज की छात्रा ज्योतिश्ना राजोरिया द्वारा जल संवर्धन पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के साथ हुआ।