ओंकारेश्वर क्षेत्र में शराब माफिया शराब बनाने के लिए कर रहा है जंगलों का सफाया

ओंकारेश्वर के जंगलों में धधक रही शराब भट्टीयां कट रहा सागौन का जंगल कच्ची शराब बनाने का धंधा जोरो पर ओंकारेश्वर क्षेत्र के जंगल में किस तरह फल फूल रहा है। इसका ताजा उदाहरण तब सामने आता है जब आबकारी विभाग की टीम वन विभाागग को बिना जानकारी दिये जंगल में धरपकड़ अभियान चलाकर शराब फैक्टरियों पर कार्यवाई करता हैं।


ओंकारेश्वर के जंगल में कच्ची शराब बनाने की लगातार मिल रही शिकायत पर पिछ्ले दिनो स्थानिय पुलिस तथा आबकारी विभाग की टीम ने 10 चार पंहियां वाहनों एवं नाव से ठिकानों पर जाकर छापेमारी की। इस दौरान घने जंगल में शराब बनाने में लगे लोग इधर-उधर भाग निकलने में सफल हुए थे।


कलेक्टर खंडवा के निर्देशन तथा जिला आबकारी अधिकारी व्ही एस सोलंकी के मार्गदर्शन मे दिनांक 31 जुलाई 2020 को संयुक्त टीम द्वारा ग्राम डुकिया के जंगलो में बैक वाटर किनारे बड़ी मात्रा में अवैध हाथ भट्टी मदिरा एवं महुआ लाहन तथा शराब बनाने के उपकरण जप्त किये। डुकिया के जंगलो में 8 अलग अलग स्थानो से लावारिस स्थिति में लगभग 230 ड्रमों में 46,000 किलो ग्राम महुआ लहान तथा 15 लीटर क्षमता की दो केनो मे 30 लीटर हाथ भट्टी मदिरा जप्त कर 8 प्रकरण पंजीबद्ध कर कुल 60 हजार किलो ग्राम महुआ लाहन तथा 30 लीटर हाथ भट्टी शराब,तथा शराब बनाने के उपकरण जप्त कर मप्र आबकारी अधिनियम की धारा 34 के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर कुल 11 प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।


        ओंकारेश्वर के जंगल में शराब बनने व क्षेत्र में ही इसकी सप्लाई होने की बात सामने आने से एक बार फिर वन विभाग व पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। मजेदार बात यह है कि एक तरफ आबकारी विभाग जंगल में बन रही शराब व भट्टियां बरामद कर रहा है वहीं वन विभाग के अधिकारी इसकी जानकारी न होने की बात कर रहे हैं।


 


*""वन विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में""*


 


जंगल में शराब की भट्टियां मिलने से वन विभाग की चाैकीदारी व सुरक्षा भी सवालाें काे घेरे में अा रही है,पूर्व में इस प्रकार की बडी कार्यवाई आबकारी एवं स्थानिय पुलिस विभाग सांथ मिलकर समय-समय पर करता चला आ रहा हैं। वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में इसलिए आ रही है की इतनी बडी मात्रा में सामग्री बिना वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की जानकारी में आये बगैर पंहुचाना संभव नहीं इतना ही नही शराब फैक्टरियों में धधक रही भट्टीयों में बैशकिमती सागौन की लकडीया ही उपयोग मे लाई जा रही हैं।


 


*ओंकारेश्वर के जंगल में अवैध शराब के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए चलाए गए अभियान में आबकारी और पुलिस महकमे को हर बार हाथ लगी बडी सफलता लेकिन वन विभाग को इसकी कोई जानकारी नही...*


 


(1) फरवरी माह 2019 में कार्यवाई के दौरान 31 हजार किलो महुआ-लहान और 215 लीटर शराब ओंकारेश्वर के निकट डुकिया के जंगल में दबिश देकर 47 लाख 18 हजार 700 रुपए मूल्य की देशी मदिरा और शराब बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री जब्त की थी।


 


(2) 20 अप्रैल 2019 शनिवार को कार्यवाई के दौरान दबिश देकर 47 लाख 18 हजार 700 रुपए मूल्य की देशी मदिरा और शराब बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री जब्त की थी। 


 


(3) 31 जुलाई 2020 को कार्यवाई के दौरान हाथ भट्टी मदिरा तथा शराब बनाने के उपकरण, ड्रामो आदि की अनुमानित कीमत 35 लाख 40 हजार रुपये के लगभग हैं। जप्त महुआ लाहन का सैम्पल लेकर शेष लाहन को विधिवत मौके नष्ट किया गया। 


 


क्या बार बार उन्हीं स्थानों पर इतनी बडी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद होना वन विभाग की एवं अवैध कारोबारीयों की मिलिभगत को नही दर्शाता..?


 


*कार्रवाई के बाद बदला जाता हैं स्थान*


 


विदित हो कि इसके पहले भी ओंकारेश्वर पुलिस और आबकारी विभाग ने ग्राम डुकिया और गुंजारी के समीप बांध के बैकवाटर में अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उसके बाद इन लोगों ने अपना स्थान बदलकर नर्मदा नदी के बीच बने टापू में कच्ची अवैध शराब बनाने क्या काम शुरू कर दिया था। जिस स्थान पर अवैध शराब बनाने का कार्य चल रहा था वहां आमलोगों का पहुंचना आसान नहीं है। इसके बाद भी शुक्रवार को पुलिस बल के साथ ही आबकारी विभाग के जवान वहां तक उस दौरान पहली बार पहुंचे थे और अवैध शराब बनाने की सामग्री को नष्ट किया गया था। 


 अवैध शराब के खिलाफ अभियान की तैयारी आबकारी और पुलिस के आला अधिकारियों ने बेहद ही गुपचुप तरीके से की थी। आबकारी और पुलिस के जवानों को बुलाकर सुबह 5 बजे ही सभी को कूच करने के निर्देश दिए गए। एक घंटे नाव में सफर के बाद सैलानी के पास एक टापू पर टीम पहुंची। यहां से डुकिया के जंगल में करीब 10 किलोमीटर पैदल चलने के बाद टीम को सफलता मिली।


 


*""टापू पर कैसे पहुंच जाती हैं इतनी बडी मात्रा में सामग्री""*


 


बड़ी संख्या में शराब बनाने की सामग्री बांध के बैकवाटर के टापू तक कैसे पहुंची यह भी सवाल उठता है। शराब बनाने के लिए सागौन की कीमती लकड़ी काटकर भट्टी में जलाई जा रही थी। इस बात से वन विभाग की लापरवाही भी उजागर हुई है। लोग जंगल काटकर अवैध शराब बनाने का व्यापार कर रहे हैं। पुर्व में भी कई इस प्रकार की कार्यवाई हो चुकी हैं तब 50 लाख के आसपास की पुलिस ने अवैध शराब बनाने की सामग्री को नष्ट किया 20 अप्रेल 2019 को भी दबीश देकर नष्ट किया था। जहां शराब बनाई जा रही थी वह स्थान रिजर्व फॉरेस्ट में आता है, वहां पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। इसके बाद शराब बनाने के लिए सामग्री और लोगों की आवाजाही विभागीय उदासीनता को उजागर करता है। . इस मामले में जानकारों का कहना है कि अवैध कारोबारी जंगल के रास्ते बड़वाह, सनावद और देवास के सीमावर्ती क्षेत्रों से आते हैं। जंगल में शराब बनाकर उसी रास्ते उसे खपाने भी ले जाते हैं।


 


क्या कहते है जिम्मेदार ----


वन क्षेत्र में इतना बड़ा व्यापार चल रहा है मेरे संज्ञान में नहीं है संबधित अधिकारी से पुरे मामले की जानकारी लेकर बारीकी से जाँच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी


 


एस एस रावत


मुख्य वन संरक्षक 


खण्डवा