साहित्य मित्र मंडल कोदरिया की 7 वीं मासिक  गोष्ठी संपन्न हुई । रविवार की शाम डॉ

 


साहित्य मित्र मंडल कोदरिया की 7 वीं मासिक 
गोष्ठी संपन्न हुई ।


रविवार की शाम डॉ संजय श्रीवास्तव के निज निवास कोदरिया पर महू शहर में तेजी से उभर रही साहित्य संस्था साहित्य मित्र मंडल कोदरिया  की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न हुई । जिसमें महू , कोदरिया स्थानीय के कवियों तथा शायरों ने कविताओं एवं गजलों का पाठ किया । कार्यक्रम में श्री धीरेन्द्र जोशी के रसीले संचालन में श्री राधेश्याम गोयल , रमेश आंजना , रमेश जैन राही , डॉ संजय श्रीवास्तव , डॉ विमल सक्सेना , सुरेश चंद्र अस्थाना , डॉ राजलक्ष्मी मोहंती , डॉ इंदुबाला प्रजापति ,, कीर्ति श्रीवास्तव , निहारिका प्रजापति , गगन खरे एवं द्रोणाचार्य दुबे  ने जमकर कविताओं एवं गजलों का पाठ किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ संजय श्रीवास्तव ने किया ।


प्रमुख कवियों की पंक्तिया


डॉ संजय श्रीवास्तव - मेरे दिल में अपने प्यार का भरम तो रहने दे ।


श्री धीरेन्द्र जोशी - तोहमतों के बीच में जीकर ग़ज़ल हमने लिखी ।


डॉ विमल सक्सेना - वर्दी ही है मेरी शेरवानी , टोपी ही है सेहरा , धरा से है मेरी आशिकी , सरहद से इश्क है गहरा ।


श्री सुरेश चन्द्र अस्थाना - कुछ लिखते हैं सुना देते हैं , अपने ग़म दोस्तों को सुना देते हैं ।


डॉ राजलक्ष्मी मोहंती - रंगों से भरा है आज ये दोनों जहां ।


श्रीमती इंदुबाला प्रजापति - सुमधुर गीत " वो कागज़ कश्ती वो बारिश का पानी " ।


श्री रमेश आंजना - मति छापजो कविता पेपर में , कागद महंगों है ।


डॉ निहारिका प्रजापति - नेकी करनी ही इबादत है जिनके लिये , जिंदगी उन्हीं की कामयाब होती है ।


श्री गगन खरे - मौत चुपके से आए मेरी ओर तो रोना नहीं ।


श्रीमती कीर्ति श्रीवास्तव - मुझे अपने शब्दों से देशभक्ति जगाना है ।


द्रोणाचार्य दुबे - मैं समझा रहा हूं पत्नी से झगड़ा करने के नियम कायदे , इन्हें अपनाएंगे तो झगड़े में भी मिलेंगे फायदे ।


 



द्रोणाा दुु