सईद नादां, बेगमगंज
ग्रामीण अंचल के अनेकों गांव में आज भी श्मसान घाटों पर शेड नहीं होने से मैदान में ही होता है अंतिम संस्कार।
पिछली पंचवर्षीय योजना में प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा अपने क्षेत्र के प्रत्येक गांव में विकसित श्मशान घाट बनाने के लिए ग्राम पंचायतों द्वारा जनपद पंचायत को अलग से प्राक्कलन दिए गए थे। जिन्हें मनरेगा के माध्यम से बनाया गया है। इसमें प्रावधान है कि कम जनसंख्या वाले गांव में सिंगल प्लेटफॉर्म बनाने के लिए एक लाख 80 हजार एवं बड़े गांवों में डबल प्लेटफॉर्म वाले श्मसान घाट निर्माण करने के लिए 3 लाख रुपए की राशि का प्रावधान है। इसमें 121 गांवों को स्वीकृति दी गई थी जिसमें 94 गांवों में श्मसान घाट निर्मित होकर चालू है जबकि 27 गांव में काम चल रहा है। इसमें साफ सुथरा श्मशान घाट टिन शेड के साथ होना अनिवार्य है लेकिन कई सरपंचों - सचिवों ने श्मशान घाट निर्माण के लिए राशि आहरण तो कर ली लेकिन श्मशान घाट के नाम पर आज भी कई गांवों में मात्र मैदान नजर आ रहे हैं। शिकायतों के बाद भी तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ द्वारा लीपापोती करके ऐसे सरपंच एवं सचिवों को अभयदान दे दिया गया था।
ऐसे सरपंचों एवं सचिवों ने अपनी सफाई में बताया कि कई गांव में आवंटित भूमि पर अतिक्रमण होने के कारण काम नहीं लगा और कहीं भूमि उपलब्ध नही कराई गई है।
गत दिवस ऐसे ही कागजी श्मशान घाट की पोल तब खुली जब तहसील के ग्राम बरखुआ में एक 45 वर्षीय व्यक्ति बसंत यादव की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई ओर उनका अंतिम संस्कार श्मसान घाट नहीं होने की दशा में खुले आसमान के नीचे तेज बरसते पानी में पालीथिन डालकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। जिससे परिजनों सहित ग्रामीणजनों में आक्रोश व्यप्त है।
आजादी के 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी बेगमगंज तहसील की चांदबड़ ग्राम पंचायत के ग्राम बरखुआ सहित अनेकों गांव में श्मसान घाट नहीं है ।जहाँ मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट के साथ टीनशेड भी मौजूद नहीं है।
आज एक मृतक बसंत यादव की चिता को पालीथिन ( पन्नी ) डालकर अग्नि देकर अंतिम संस्कार किया गया।
बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आने से लोग आक्रोशित है। जहां मुक्तिधाम की सुविधा नहीं है । अंतिम संस्कार के समय तेज बारिश हो रही थी बड़ी मुश्किल से सूखी लकड़ियां जुटाईं गई लेकिन ना तो मुक्तिधाम ओर ना टीन शेड खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक की पानी के नीचे बड़ी मुश्किल से अंतिम संस्कार किया गया।
चांदबड़ पंचायत सचिव संजय दुबे ने बताया कि ग्राम बरखुआ में श्मसान घाट निर्माण कराने के लिए तीन वर्ष पहले जनपद पंचायत को प्रस्ताव दिया गया है लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिलने से काम नहीं लग पाया है। इसके अतिरिक्त श्मसान घाट कर लिए आवंटित भूमि पर अतिक्रमण भी है जो राजस्व विभाग द्वारा आज तक हटवाया नही गया है। फिर कैसे बनेगा श्मसान घाट।
उल्लेखनीय है कि चांदबड़ ग्राम पंचायत पूर्व जनपद अध्यक्ष स्वर्गीय माधो सिंह पटेल एवं पूर्व अध्यक्ष साहब सिंह पटेल का गृह ग्राम है जोकि क्षेत्रीय विधायक देवेंद्र पटेल के चाचा एवं भाई होते हैं । विधायक के स्वयं के गृह ग्राम में श्मसान घाट नहीं होने ओर विकास कार्यों की दुर्दशा चर्चा का विषय बनी हुई है ।
फोटो - ग्राम बरखुआ में श्मसान घाट नहीं होने से खुले मैदान में बरसते पानी में पालीथिन के नीचे होता अंतिम संस्कार ।
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