अनुपयोगी पॉलीथिन से बनेगी सीडबॉल

 


सईद नादाँ, बेगमगंज

वनपरिक्षेत्राधिकारी अरविंद अहिरवार द्वारा एक लाख से ऊपर दूध की अनपयोगी थैलियों को एकत्रित कराकर उनमें विभिन्न प्रजातियों के फल एवं छायादार वृक्षों की पौध तैयार की ओर फिर उन्हें विभिन्न धार्मिक स्थलों , श्मशान भूमि , शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थानों पर रोपण कराए जाने के बाद उक्त पौधों से निकाली गई पॉलीथिन को कबाड़ में बेचकर उससे 25 हजार सीट्स बॉल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

वनपरिक्षेत्राधिरी अरविंद अहिरवार का प्रकृति से जुड़ाव एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न स्तर पर काम करने की अलख जगाई जा रही है।इसको लेकर उनके द्वारा रोजाना नित्य नए-नए प्रयोग कर अनूठी पहल की जा रही है।

 इस सप्ताह उन्होंने एक नई पहल करते हुए अपना लक्ष्य निर्धारित किया कि जिन स्थानों पर बड़े पैमाने में पौधारोपण हो रहे हैं वहां से पौधारोपण के बाद बचने वाली काली पन्नी एवं दूध की अनपयोगी थैलियों को पर्यावरण मित्र या पौधरोपण करने वाले व्यक्ति वहीं पर आसपास फेंक कर चले जाते हैं। जिसके कारण पन्नी वहीं आसपास मिट्टी में मिलकर मिट्टी को उर्वरकता से वंचित करके उस स्थान को बंजर बना देती है। मिट्टी के साथ फिर नदी नाले में जाकर पानी की निकासी में अवरोध पैदा करती है ।

 रेंजर अरविंद अहिरवार ने बताया कि उनकी पहल पर वन अमले द्वारा गांव-गांव एवं सभी जगह हुए पौधोंरोपण के बाद निकलने वाली पन्नी ( पॉलिथिन ) को एकत्रित कर वापस रेंज बुला लिया गया है। उन्हें एकत्रित कर उसे कबाड़ी को बेंच दिया जाएगा । 

उसके बाद उससे जो पैसा Grocery होगा , उसे पैसे से विभिन्न प्रजाति के पौधों की 25 हजार सिट्स बाल तैयार करके उनका मैदानी इलाकों एवं बंजर पड़ी भूमि पर उपयोग किया जाएगा।

फोटो - रेंजर अरविंद अहिरवार अनपयोगी पन्नी एवं तैयार हो रही सीड्स बॉल के साथ ।

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