कृषि वैज्ञानिक डॉ . जी.एस गाठिये ने किया सरदारपुर ब्लॉक के गांवों का भृमण

आशीष यादव, धार 

कृषकों के प्रक्षेत्र पर डायग्नोस्टिक भ्रमण डॉ . जी . एस गाठिये , सस्य वैज्ञानिक ने जिले के सरदारपुर ब्लॉक के गांव टिमायची , सिंगोड़िया , कुमारूण्डी में कृषकों के प्रक्षेत्रों पर नैदानिक भ्रमण किया । डॉ . जी . एस . गठिये , सस्य वैज्ञानिक ने बताया कि जिले में सोयाबीन एवं मक्का की फसलें औसतन 25-30 दिन की हो गई है , वर्षा पर्याप्त होने से फसलों औसतन बेहतर स्थति में है परन्तु मक्का में कहीं - कहीं फॉल आर्मी वर्म एवं सोयाबीन में तना मक्खी का प्रकोप देखा गया है । उन्होने बताया कि मक्का में फॉल आर्मी वर्म का अधिक प्रकोप होने पर फसल को एक ही रात में भारी नुकसान पहुंचा सकता है । इसलिए ही इसका नाम सैनिक कीट है । इस कीट की व्यस्क मादा मोथ पौधों की पत्तियों और तनों पर अण्डे देती है . एक बार में मादा 50 से 200 अण्डे देती है . मादा अपने 20-21 दिनों के जीवन काल में 10 बार यानी 1700-2000 तक अण्डे दे सकती है , ये अण्डे 3 से 4 दिन में फूट जाते हैं . इनसे जो लार्वा निकलते है वो 14 से 22 दिन तक इस अवस्था में रहते हैं । कीट के लार्वा के जीवन चक्र की तीसरी अवस्था तक इसकी पहचान करना मुश्किल है लेकिन लार्वा की चौथी अवस्था में इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है , चौथी अवस्था में लार्वा के सिर पर अंग्रेजी के उल्टे ' वाई ' आकार का सफेद निशान दिखाई देता है । इसके लार्वा पौधों की पत्तियों को खुरचकर खाता है जिससे पत्तियों पर सफेद धारियाँ दिखाई देती हैं । जैसे - जैसे लार्वा बड़ा होता है , पौधों की ऊपरी पत्तियों को खाता है और बाद में पौधों के भुट्टे में घुसकर अपना भोजन प्राप्त करता है । इस कीट के सम्पूर्ण नियंत्रण हेतु किसान भाईयों इमामेक्टिन बेंजोएट 5 % SG की 0.4 ग्राम या स्पीनोसेड़ 45 SC की 0.3 मिली या थायोमेथोक्सोम 12.6 % + लेम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.5 % ZC की 0.3 मिली या क्लोरेण्ट्रानिलिप्रोल 18.5 % SC की 0.3 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी । वहीं सोयाबीन फसल पर तना मक्खी का प्रकोप शुरू हो गया है । तना मक्खी इल्ली सफेद रंग की तने के अंदर रहती है । वयस्क कीट चमकीले काले रंग का 2 सेमी आकार का होता है । इस कीट की मादा पत्तियों पर पीले रंग के अंडे देती है , जिनसे मैगट निकलकर पत्तियों की शिराओं में छेद कर सुरंग बनाती हुई तने में प्रवेश करती है तथा तने को खोखला कर देती हैं । धीरे - धीरे पत्तियां पोषक तत्वों की कमी से पीली होने लगती है , साथ ही घेरे के रूप में पसल नष्ट हो जाती है । उन्होंने तना मक्खी के नियंत्रण के लिए लेम्डासाइहेलोविन 9.5 प्रतिशत एवं थायमियॉक्साम 12.6 प्रतिशत की 125 मिली प्रति हेक्टेयर मात्रा अथवा लेम्डासाईहेलोबिन 4.9 एससी 300 मिली प्रति हेक्टेयर दवा 500 लीटर अथवा क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 125 मिली अथवा बीटासायफ्लूचिन 8.49 प्रतिशत एवं इमिडाक्लोप्रिड 19.8 प्रतिशत मात्रा की 350-400 मिली प्रति हेक्टर का 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी । 



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