आस्था का उमड़ा जन सैलाब नंदी भगवान को जल पिलाने के लिए लगी भक्तो की भीड़, शिवरात्रि के चार दिन बाद सुबह से भक्तो की मंदिरों में भीड़ लगी

आशीष यादव, धार

कहते हैं कि आस्था में ही परमात्मा होता है ऐसा ही नजारा धार जिले भर में शनिवार की सुबह से देखा को मिला मंदिरों में महिला व पुरुष नंदी व गणेश शिव पार्वती परिवार को जल पिला रहे थे वही जल पीने की घटना को सुनकर लोग बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुँचने शनिवार को भगवान शिव के वाहन नंदी के पानी पीने की खबर ज़िले व मुख्यालय पर फैलती रहीं। धारेश्वर मंदिर में नंदी के पानी पीने की खबर फैलते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। वहीं विक्रम नगर महादेव मंदिर में भी नंदी को पानी पिलाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शनिवार सुबह से शाम को मंदिर में नंदी को पानी पिलाने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। मंदिर के पंडित ने बताया कि सुबह से भक्त आ रहे है एक भक्त ने जैसे चम्मच से नंदी के सामने पानी रखा तो नन्दी भगवान पानी पी गए हो इसकी सूचना मिलते ही शहर गांव जिले भर के मंदिरों भक्तो की भीड़ लगने लगी सभी पानी पिलाकर मनोकामनाएं मांग रहे थे।

धीरे-धीरे यह सूचना सभी फैल गई। लोग घर से पानी लेकर नंदी को पिलाने के लिए पहुंचने लगे। देर रात तक मंदिर में नंदी को पानी पिलाने के लिए होड़ लगी रही। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी नंदी के पानी पीने ने लिए मंदिरों में निकल पड़े जिले के सभी महादेव मंदिर में भी नंदी को जल पिलाने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।

जल पिलाने के लिए लगी होड़ :

शहर में यह घटना सबसे पहले विक्रम नगर के लोगो द्वारा जल पिला है जो महादेव मंदिर में भी शनिवार को उस समय श्रद्धालुओं का तांता लग गया, जब किसी भक्त ने नंदी द्वारा पीने की बात आग की तरह फैली वही 1 बजे महिला मंदिर में दर्शन पूजन करने गई। पूजा के बाद उसने चम्मच में दूध नंदी की मूर्ति के आगे रखा तो जल धीरे-धीरे गायब हो गया। बस इस बात की चर्चा फैली और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों का तांता लग गया। हालांकि मूर्ति छोटी थी इसलिए लोग चम्मच ही लेकर पहुंचे। किसी ने दूध पीने का वीडियो भी वायरल कर दिया। इसके बाद लोग अपनी उत्सुकता का निदान करने भी मंदिर पहुंचे। देर शाम तक नंदी को जल पिलाने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे।

वैज्ञानिक जवाब

वही भगवान कि आस्था व वैज्ञानिक प्रतिक्रीया दोनों अलग अलग है वही जल पीने वाली मूर्तियों की घटना को वैज्ञानिक रूप से केशिका क्रिया के सिद्धांत या सतह के तनाव, आसंजन और सामंजस्य के कारण झरझरा सतहों के भीतर तरल पदार्थ की गति द्वारा समझाया जा सकता है। । उन्होंने कहा कि सतही तनाव की घटना सर्वव्यापी पानी के नल में देखी जा सकती है, जहां पानी की एक बूंद निलंबित रहती है और छूने पर निकल जाती है। इसी तरह, जब एक चम्मच दूध मूर्ति को छुआ जाता है, तो दूध का सतही तनाव तरल को चम्मच से ऊपर और बाहर खींचता है, इससे पहले कि गुरुत्वाकर्षण मूर्ति के सामने से नीचे चला जाए। जैसे ही चम्मच में तरल या दूध का स्तर गिरा, इसने मूर्ति को उस स्थान के नीचे लेप किया जहाँ चम्मच रखा गया था। इसी तरह की एक घटना ने 21 सितंबर, 1995 को मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगा दी थी और कुछ लोग तो भगवान के लिए बाल्टी भर दूध भी ले जा रहे थे वही डॉ उदय निगवाल प्रोफेसर पीजी कालेज धार बताते है आस्था से बढ़कर को वैज्ञानिक नही है वही आस्था और वैज्ञान दोनों अपनी जगह सही है 




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