भष्टाचार की धार है धार नगरपालिका, भष्टाचार ऐसा की धरातल पर नजर ही नही आया काम, सड़क पैचवर्क के नाम सामग्री खरीदी में लाखों का घोटाला

आशीष यादव, धार

नगरपालिका में एक बार फिर सड़क पैचवर्क के नाम सामग्री खरीदी में लाखों का घोटाला होने की स्थिति सामने आई है। वर्ष 19-20 और 20-21 में निकाय द्वारा पैचवर्क मटेरियल के नाम पर करीब 25 लाख की सामग्री खरीदी गई है। सामग्री की खरीदी निकाय के टाईम किपर की डिमांड पर कर ली गई है। इनके भुगतान बिल पेश हो गए हैं। पैचवर्क सामग्री कहां है इसका कोई जवाब नहीं है। दरअसल तीन अलग-अलग फर्मों से की गई खरीदी में सामग्री की इंट्री स्टॉक रजिस्टर में दर्ज नहीं की गई। यह गंभीर मामला है। शहर में सड़कों पर पिछले दो साल में गड्ढें भरे नहीं गए है। इस वर्ष भी छबीना निकलने के पूर्व सड़कों के गड्ढों को पीली मिट्टी से भरा गया था। हंगामा मचने पर चूरी डाली गई। अगर 25 लाख की सामग्री खरीदी गई है तो शहर में पैचवर्क-डामरीकण क्यों नहीं किया गया। आज भी शहर की कई गलियों में बड़े-बड़े गड्ढें है। इस तरह की जानकारी सूचना के अधिकार में जुटाए गए दस्तावेजों में सामने आई है। सर्वाधिक गड़बड़ियां नगरपालिका से सीएमओ पद से मुक्त किए गए विजय कुमार शर्मा के कार्यकाल में हुई है।


स्पेशल आॅडिट होना चाहिए

रविवार को आरटीआई एक्टिविस्ट सुनील सावंत पत्र परिषद् में दस्तावेजों को सामने रखकर खरीदी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थितियों से पूरी संभावना है कि नगरपालिका में बगैर सामग्री खरीदे बिल लगाए गए हैं। इसकी गंभीरता से जांच होना चाहिए। जिला सतर्कता समिति सहित राज्य शासन को विशेष दल गठित कर निकाय में पिछले दो-तीन साल की खरीदी, बिक्री एवं सामग्री उपयोग की जांच करना चाहिए। इधर यह भी बात सामने आई है कि शहर में पैचवर्क के लि गड्ढों की नप्ती सहित पूरा स्टीमेट बनाया जाता है। इंजीनियर की देखरेख और रिपोर्ट पर सामग्री उपयोग का आंकलन कर स्टॉक की सामग्री उपयोग की जाती है या फिर नई खरीदी की जाती है। नगरपालिका ने समयपाल की मांग पर खरीदी कर ली है। यह सब नियमों के तहत नहीं है।


1 ही महीने में 4 बार में 20 लाख की खरीदी

 सावंत द्वारा पेश दस्तावेजों को देखने के बाद कागजों पर खरीदी की आशंका मजबूत हो रही है। दरअसल वर्ष 2020 में मार्च माह से शहर में लॉकडाउन लग गया था। मई में अनलॉक के बाद शहर में किसी भी प्रकार का पैचवर्क का काम नहीं किया गया। वर्ष 2020 के फरवरी माह में यानि लॉकडाउन से 1 महीने पहले फर्म चेतनदास कांट्रेक्टर एवं सप्लायर्स से करीब 10 लाख का पैचवर्क सामग्री बिटूमीन पैक 5 फरवरी को खरीदा गया। इसके 6 दिन बाद 11 फरवरी को फिर सागर की मयंक आईटी साल्युशन से करीब 5 लाख की खरीदी की गई। इसके 6 दिन बाद 18 फरवरी को चेतनदास फर्म से करीब 5 लाख की सामग्री खरीदी गई। इस तरह फरवरी माह में करीब 20 लाख की पैचवर्क सामग्री ली गई। वर्ष 2020 और 2021 में शहर में कहीं भी पैचवर्क नहीं किया गया। 20 लाख की सामग्री कहां गई है।


डामरीकरण के लिए 65 लाख की अलग खरीदी

प्रारंभिक तौर पर 2 वर्षों में करीब 28 लाख की खरीदी की गई है। यह दस्तावेज सूचना के अधिकार में मिले है, लेकिन सूत्रों की माने तो पैचवर्क के नाम पर करीब 38 लाख की खरीदी की गई है। इधर शहर में राजबाड़ा चौक, बस स्टैंड पर डामरीकरण किया गया था। इस डामरीकरण के लिए जेम संस्था के माध्यम से करीब 64 लाख का डामर अलग से खरीदा गया था। डामरीकरण का काम विभाग द्वारा करवाया जाना बताया गया। वहीं माप पुस्तिका में इसे इंद्राज भी नहीं किया है।


अधूरी जानकारी देकर परेशान करने की कोशिश

सावंत ने बताया कि शहर में गड्ढें भरने की जानकारी मांगी गई थी। अपूर्ण जानकारी दी गई है। जानकारी ना देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। जानकारियों को लेकर गुमराह भी किया जा रहा है। मार्च 2020 से अगस्त 2020 तक की जानकारी मांगी थी, लेकिन शाखा प्रभारी द्वारा माह जुलाई से अगस्त तक दो माह की जानकारी दी गई। मार्च से जून तक की जानकारी नहीं दी जा रही है। इसको लेकर सीएमओ को पत्र भी लिखा है।


बॉक्स-1

रजिस्टरों पर कर्मियों के हस्ताक्षर जाली

सावंत ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारियों में कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। सामग्री से संबंधित रजिस्टरों पर कर्मियों के हस्ताक्षर जाली पाए गए है। कर्मियों को मालूम नहीं है और उनके हस्ताक्षर रजिस्टर पर मौजूद है। हैंडपंप के लिए 100 रॉड खरीदी की गई थी। यहां पर कर्मी के हस्ताक्षर है, लेकिन कर्मी का हस्ताक्षर वास्तविक नहीं है। 



टिप्पणियाँ