अम्बेडकर विश्वविद्यालय में डॉ. अम्बेडकर पीठ की भविष्यगामी विकास रणनीतियाँ’ विषय पर बैठक का आयोजन

 *डॉ. अंबेडकर को समग्रता में पढ़ने की जरूरत है : डॉ. विजय सोनकर शास्त्री* 

*डॉ. अम्बेडकर के विचार एवं दर्शन को आत्मसात करना आवश्यक : प्रो. आशा शुक्ला, कुलपति*

महू। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर को लोग अपने-अपने दृष्टिकोण से देखते हैं। बाबा साहब का चिंतन राष्ट्रव्यापी एवं समावेशी रहा है। डॉ. अंबेडकर की नीतियाँ एवं कार्यविधियाँ सदैव सुधारवादी व्यवस्था की पक्षधर रही हैं।  डॉ. अम्बेडकर सदैव रूढ़ियों और जड़ताओं पर मुखर स्वर में बात रखते थे। बाबा साहब कहते हैं कि यह राष्ट्र आकस्मात नहीं बना बल्कि भारतीय मनीषियों के तप, त्याग और बलिदान की देन है। डॉ. अंबेडकर के समग्र अध्ययन और जीवन दर्शन पर गहन शोध की आवश्यकता है, डॉ अम्बेडकर पीठ की जिम्मेदारी इस दिशा में बढ़ जाती है। समग्रता और राष्ट्र निष्ठा के साथ पुनः अध्ययन कर उन पक्षों पर चिंतन एवं मनन करने की आवश्यकता है। उक्त बातें डॉ. बी. आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय में स्थापित डॉ. अंबेडकर पीठ द्वारा आयोजित ‘डॉ. अम्बेडकर पीठ की भविष्यगामी विकास रणनीतियों पर केंद्रित बैठक में अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार  के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विजय सोनकर शास्त्री ने बतौर विषय विशेषज्ञ कही। 

डॉ. अंबेडकर द्वारा भारत को सौंपे गए संविधान की मूल प्रति में भारतीय सनातन संस्कृति से जुड़ें हुये कई चित्रों को देखा जा सकता है।  राष्ट्र का निर्माण विपरीत विचारधारा से नहीं बल्कि समान विचारधारा के व्यक्तियों से बनता है। डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता के साथ ही उनकी दूरगामी दृष्टि में अंतिम पायदान के व्यक्तियों के चिंतन के लिए जाना जाता है। डॉ. अंबेडकर ने राष्ट्र के विकास के लिए सुन्दर सा स्केच बनाया था जिसमें रंग भरने का कार्य शिक्षण संस्थाओं और बेहतर नीतियों के जरिये की जा रही है। डॉ. अम्बेडकर ने आर्थिक क्रांति के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्य भी किये हैं जिनके कारण उन्हें राष्ट्र गौरव के रूप में याद किया जाता रहेगा। 

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने बाबा साहब के परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर के विचार समाज एवं एवं राष्ट्र के मार्गदर्शक रहे हैं। ब्राउस डॉ. अम्बेडकर के विचार एवं दर्शन को पाठ्यक्रमों में समाहित कर राष्ट्र एवं समाज में उनके विचारों को प्रसारित करने का प्रयास कर रहा है जिससे स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। बुद्ध , संत कबीर और महात्मा ज्योतिबा फुले को डॉ. अम्बेडकर अपना वैचारिक गुरु मानते थे।

बैठक में यूनाइटेड नेशन ह्युमन सेटेलमेंट प्रोग्राम (यू. एन. हैबिटेट) के वरिष्ठ सलाहकार प्रो. मार्कंड राय बतौर विषय विशेषज्ञ डॉ. अम्बेडकर को विचार प्रवाह के रूप में देखना चाहिए। नेतृत्व, विचार एवं दर्शन कभी नहीं मरता है। बाबा साहब के महापरिनिर्वाण पर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व एवं दर्शन को समग्रता से देखने की जरुरत है। मैक्समुलर और मैकाले मिलकर गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था एवं संस्कृत भाषा नष्ट करने का प्रयास किया। बाबा साहब का मानना था कि हम सबसे पहले भारतीय हैं। उन्होंने संविधान के माध्यम से सभी को एकजुट करने का प्रयास किया। बाबा साहब ज्ञान, अभिमान और शील को अपना देवता मानते थे। यह विश्वविद्यालय बाबा साहब के विचार एवं दर्शन को आगे बढ़ा रहा है यह एक सुखद है।

एम.एस. यूनिवर्सिटी बड़ोदरा के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. देवलदास गुप्ता ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर के चिंतन एवं नीतियाँ में हमेशा राष्ट्र एवं समाज का सर्वांगीण विकास ही रहा है। सामाजिक कुरीतियाँ एवं बुराइयों को हटाकर वे एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने अपनी संवैधानिक नीतियों में समरसता का समावेश करने का पूरा प्रयास किया। हमें उनके सपनों का राष्ट्र बनाने के लिए उनके कृतित्व को अच्छे से समझने एवं पढ़ने की जरुरत है।     

ब्राउस संकायाध्यक्ष प्रो. डी.के. वर्मा ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर के विचार, दर्शन एवं कार्यों को समाज में अमल करने की जरुरत है। उनके चिंतन को आत्मसात कर ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

बाबू जगजीवन राम पीठ, ब्राउस के प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने डॉ. अम्बेडकर के समग्र चिंतन को उद्धृत करते हुए बताया कि डॉ. अम्बेडकर के विचार एवं दर्शन को आत्मसात कर कर्म और चेतना के साथ विश्वविद्यालय निरंतर अकादमिक गतिविधियां कार्यान्वित कर रहा है।

डॉ. अम्बेडकर पीठ, ब्राउस के प्रोफ़ेसर डॉ. देवाशीष देवनाथ ने बताया कि डॉ. अम्बेडकर पीठ डॉ. अम्बेकर के विचार, दर्शन, नीतियों एवं उनके कार्यों पर केन्द्रित शोध एवं अकादमिक कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बैठक में आये सुझावों से पीठ की अकादमिक गतिविधियों के कार्यान्वयन में सुगमता आयेगी।   

ब्राउस कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा, संकाय अध्यक्ष डॉ. मनीषा सक्सेना, शोध अधिकारी डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, डॉ. रामशंकर सहित, सहायक कुलसचिव श्रीमती संध्या मालवीय, डॉ. दीपक कारभारी सहित शिक्षक, अधिकारी मौजूद रहे।