रामचरित्र मानस पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का हुआ आंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजन, कई महान विभूतियों ने लिया भाग

 लोकसत्ता के महानायक हैं राम- मंदाकिनी

सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं वनवासी राम, वनवास से लोकव्यापी हुये राम- प्रो. आशा शुक्ला

महू। डा. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू के बुद्ध विहार सभाग्रह में आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, शिक्षा विभाग एवम तुलसी मानस प्रतिष्ठान, भोपाल के सँयुक्त तत्वावधान में आयोजित वनवासी श्रीराम पर केंदित विषय पर मुख्य वक्तव्य देते हुये दीदी मंदाकिनी श्री रामकिंकर जी ने कहा कि श्री राम का आयोजन डा. अम्बेडकर की जन्मस्थली महू से शंखनाद होना एवम त्रिवेणी का एकत्रीकरण एक ऐतिहासिक, अविस्मरणीय क्षण है। श्रीराम की ज्ञान गंगा का इस माटी से प्रवाहित होना, लोकमानस और लोककल्याण के लिये अत्यंत सार्थक सिद्ध होगा. भारत के संविधान निर्माता डा. अम्बेड्कर स्वय समावेशी एवम समरसता के प्रतिमान हैं. वनवासी राम के साथ लोकसत्ता है तथा लोक सत्ता के नायक हैं राम. और वे राजसत्ता के पोषक रावण से युद्ध करते हैं. श्रीराम के पास सिंहासन नहीं है लेकिन लोक की सत्ता उनके साथ है और इसी सत्ता के कारंण वे रावण के दम्भ को चकनाचूर करते हैं।
            दीदी मंदाकिनी ने रामचरित्र मानस के अयोध्याकाण्ड, सुंदरकाण्ड समेत सभी काण्डो की विस्तृत चर्चा वे करती हैं। श्रीराम का व्यक्तित्व वनवास में ही निखरता है और इस दौरान गिरिवासी, वनवासी सभी को गले लगाते हुये अपनी यात्रा तय करते हैं। जटायु को अपने स्नेह से अभिसिंचित करते हैं और शबरी के जूठे बैर खाकर सभी विभाजनो को खण्डित करते हैं। हनुमान की चर्चा करते हुये वे कहती हैं कि भक्त और उसके आराध्य में भी कोई भेद नहीं है और श्री राम का समवेशी व्यक्तित्व और समरसता का भावबोध उन्हे औरो से अलग करता हैं. श्रीराम का पूरा जीवन बिषमता से समता की ओर उन्मुख है.  दुनिया के संकट को पार लगाने वाले श्रीराम को केवट पार लगाता है. सम्पूर्ण आदिवासी समाज में यह संदेश जाता हैं कि राम हमारे हैं और हम सब राम के हैं. यहाँ धर्म जाति, ऊंच-नीच, छोटा-बडा के बीच कोई भेद नहीं करते है. दीदी मंदाकिनी ने सुश्री उषा ठाकुर संस्कृति मंत्री म. प्र. शासन की प्रसंशा करते हुये कहा कि शिक्षण संस्थानो में श्री राम पर केंद्रित बिषयो को शामिल करना एक एतिहासिक निर्णय है और भारत के सांस्कृतिक आंदोलन की एक शुरुआत है क्योंकि म. प्र. भारत का ह्रदय स्थल है और इसीलिये श्रीराम की ज्ञान गंगा का डा. अम्बेडकर की जन्म स्थली से प्रवाहित होकर विश्व के सुदुर क्षेत्रो तक पहुँचेगी ऐसा मेरा विश्वास है।
म. प्र. की संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने सभी अतिथियो का स्वागत करते हुये कहा कि म. प्र. सरकार उन सभी गिरिवासी, आदिवासी, शोषित, वंचित समाज के लिये समर्पित है और श्री राम पर केंद्रित आयोजनो के माध्यम से श्री राम के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को लोक से जोडने का एक सार्थक प्रयास है. तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याधय्क्ष श्री रघुनंदन शर्मा ने कहा कि तुलसी मानस प्रतिष्ठान विगत तीन दशको से वनवासी राम के रामराज्य की संकल्पना तथा उनकी लोकव्यापी, कल्याणकारी तथा सामाजिक समरसता की नीतियो को लोक व्यापी बना रहा है। उन्होने डा. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुये कहा कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण और समरसता को बडाने के लिये निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर श्री माखन सिन्ह ने अपने सम्बोधन में कहा कि आठ सौ वर्षो की गुलामी ने भारतीय स्वाभिमान के प्रतीको और संस्कृति को रौधने का प्रयास किया किंतु भारतीय संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियो से समृद्ध है तथा लोक ग्राही है. । उन्होने कहा कि डा. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान वि. वि. में श्री राम पर केंद्रित यह आयोजन डा. अम्बेड्कर व मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के सामाजिक समरसता और लोक में उन्मुख समावेशी भावो को संवर्धित करेगा।
डा. अम्बेडकर वि. वि. की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि यह वि. वि. सामाजिक समरता पर ही पूर्ण रुप से केंद्रित है. अगर श्री राम का वनवास न होता तो उनका लोकव्यापी स्वरूप सामने नहीं आ पाता और यह विश्वविद्यालय भी उन्ही सिद्धांतो के साथ निरंतर सामाजिक समरसता एवम सद्भाव के साथ आगे बड रहा है. श्री राम ने शबरी के जूठे बैर खाये, केवट और जटायु को गले लगाया तथा निषाद राज को बराबरी का सम्मान देकर यह संदेश दिया कि समाज में कोई गैर बराबरी नहीं है. कुलपति ने यह भी कहा कि यह वि. वि. डा. बी. आर. अम्बेडकर की जन्म स्थली पर केंद्रित है और डा. अम्बेडकर की उच्च आदर्शो और मानदण्डो को स्थापित करने और लोक व्यवहार में उनके बिचारो को उतारने के लिये सतत क्रियाशील है. श्री राम भारत की संस्कृति की आत्मा हैं और डा. अम्बेडकर भारत के सर्वोच्च विधान के महानायक हैं. इस अवसर पर देवी अहिल्या वि.वि. की कुलपति प्रो. रेणू जैन ने श्री राम के चरित्र के विभिन्न आयामो पर विस्तृत चर्चा की. दीदी मंदाकिनी का स्वागत सुश्री उषा ठाकुर, प्रो. आशा शुक्ला कुलपति, डा. अजय वर्मा कुलसचिव, प्रो. आर. के. शुक्ला, प्रो. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, साहित्य अकादमी के निदेशक डा. विकास दवे,  श्री सुरेंद्र बिरहे, डा. अजय दुबे एव श्री जितेंद्र पाटीदार ने किया।
इस कार्यक्रम का सफल संचालन श्री देवेंद्र रावत जी एवम धन्यवाद ज्ञापन राजेंद्र शर्मा ने किया।
द्वितीय सत्र में मानस के अयोध्या काण्ड पर अधारित ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी इस अवसर पर तुलसी मानस प्रतिष्ठान, साहित्य अकादमी, अ‍ॅम्बेडकर वि. वि., शिक्षा विभाग राज्य ओपन स्कूल तथा महू के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।