पश्चिम के तथाकथित सेक्युलर, प्रोग्रेसिव समाज का हिंदुत्व को खत्म करने का प्लान

 हममें से बहुत से भारतीय पश्चिम को हर बात में अपना आदर्श मानते हैं और हर छोटी बड़ी बातों के लिए पश्चिम की ओर ही देखते हैं, यह सोच कर कि हमें रास्ता हर मामले में वहीं से मिलेगा।

 लॉर्ड मैकाले की आत्मा जब भी भारत की स्थिति देखती होगी तो बहुत प्रसन्न होती होगी और प्रसन्न क्यों ना हो? उसने जो सपना देखा था और भारतीय शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त करके शिक्षा का जो सिस्टम भारत में शुरू करवाया उसका मुख्य उद्देश्य था कि उस शिक्षा को पाने के बाद त्वचा के रंग और सूरत से तो भारतीय काले ही रहेंगे पर मन, बुद्धि और थॉट प्रोसेस से वे अंग्रेज यानी पश्चिमी सोच वाले होंगे। आज वह सब हमें भारतीय समाज में देखने को मिल रहा है।

एक बात और, आप लोगों ने देखा होगा कि वामपंथी अक्सर पश्चिम के बारे में यह कहते नहीं थकते हैं कि पश्चिम के लोग बहुत सभ्य हैं और वहां का समाज बहुत ही इंक्लूसिव है यानी समावेशी है। वहां धर्म, जाति, रंग के नाम पर भेदभाव नहीं होता है और वे लोग बहुत ही प्रोग्रेसिव होते हैं। आइए हम आपको दिखाते हैं कैसा है इन लोगों का तथाकथित प्रोग्रेसिव कैरेक्टर : 

बात बहुत पुरानी नहीं है, 10 11 और 12 सितंबर को पश्चिम के 50 से अधिक नामचीन विश्वविद्यालयों ने मिलकर एक सम्मेलन करवाया जिसका शीर्षक था "Dismantling Global Hindutva"। नाम से ही समझ आ रहा है कि इसका उद्देश्य है हिंदुत्व और उसके वैश्विक प्रभाव को खत्म करना।

क्या कोई प्रोग्रेसिव समाज किसी अन्य सभ्यता या सोच या धर्म को खत्म करने की सोच रखेगी? क्या जिस तरह से ग्रीक, यूनानी और मिस्र जैसी उन्नत सभ्यताओं को खत्म कर दिया गया, वैसा ही यह लोग हिंदुत्व और भारत के साथ करना चाहते हैं?

 इस सम्मेलन का पोस्टर जो मीडिया में जारी किया गया था, उसमें एक कार्टून बनाया गया था जिसमें r.s.s. के स्वयंसेवकों को कील के शेप में दिखाया गया था और एक आदमी हथौड़ी से एक-एक करके कीलों को निकाल कर फेंक रहा है। इस से एक बात पता चल चलती है कि वे यह मानते हैं कि जब तक r.s.s. को खत्म नहीं कर देते हैं तब तक हिंदुत्व का खात्मा मुश्किल है। समझदार के लिए इशारा ही काफी है और नासमझो के बारे में तो बात करना ही बेकार है।

इस सम्मेलन में एक सत्र में 101 तरीके बताए गए हैं जिससे यह तथाकथित प्रोग्रेसिव लोग यानी कि वामपंथी लोग हिंदुत्व पर सवाल खड़े कर सकते हैं।

 हिंदुत्व पर हमले तो लगभग 1000 वर्षों से हो रहे हैं पर इस समय सभ्य समाज में पहली बार खुले तौर पर सीधा-सीधा इंटेलेक्चुअल यानी कि वैचारिक हमला हिंदुत्व पर इस सम्मेलन में हुआ है।

 साउथ अफ्रीका में भारतीयों पर किस तरह से हमले हो रहे हैं हम सब देख रहे हैं और ऐसा लगता है कि इसी तरह की ताकतें लोगों को शांतिप्रिय हिंदुओं के खिलाफ भड़का कर उनके प्रति हिंसा फैलाना चाहते हैं।

इसी सम्मेलन के एक सत्र में यह तक कह दिया गया कि हिंदुत्व ना तो धर्म है ना ही कोई सांस्कृतिक पहचान है। वक्ताओं ने हिंदुत्व की तुलना हिटलर के नाजी और इटली के मुसोलिनी तक से कर डाली।

 इस सम्मेलन में वह सब कुछ हुआ जो भारत के खिलाफ है पर कमाल की बात है कि कहीं से भी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं आई। कोई उन लोगों से यह क्यों नहीं पूछ रहा है कि इस समय तालिबान ने सारे मानवीय मूल्यों को तबाह कर दिया है, उसके ऊपर सम्मेलन करने की जरूरत है पर शायद यह लोग तालिबान पर से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

 बहरहाल, यह वीडियो आप सब को इस सम्मेलन के बारे में बताने के लिए बनाया गया है। आपको अगर इस सम्मेलन के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो इस सम्मेलन की वेबसाइट www. dismantlinghindutva.com को खोल कर देखिए।

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