वह फौजी है कि नहीं यह तो पक्का नहीं, पर उसने दर्जनों लोगों को इंदौर के एक चौराहे पर फौजियों की तरह दंड तो दे दिया


इंदौर के एक व्यस्त चौराहे पर पुलिस और नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ-साथ एक ऐसा आदमी भी ड्यूटी पर लगभग दिनभर तैनात था जिसने फौज की आर्मर्ड रेजीमेंट की वर्दी पहनी हुई थी और उसकी वर्दी पर भारतीय सेना की 81वी आर्मर्ड रेजीमेंट का एंब्लेम लगा हुआ था।


5 करोड़ की कार वाले युवक को उठक बैठक लगाने वाला वीडियो तो आप सब ने देखा ही होगा, इसलिए हम आपको बता देना चाहते हैं कि उस वीडियो में यही शख्स उस युवक को उठक-बैठक लगवा रहा था।


एक आम आदमी के लिए तो यह एक सामान्य सी बात है कि एक फौजी जवान प्रशासन को अपनी सेवाएं दे रहा है पर जानकारों के लिए यह बहुत ही असाधारण बात है।


दरअसल फौज इस तरह से तभी किसी भी सिविल क्षेत्र में दाखिल होती है जब प्रशासनिक तंत्र पूरी तरीके से फेल हो चुका होता है और फौज को जिले का डीएम अपने क्षेत्र में मिलिट्री कमांडर को लिखित में देता है कि स्थितियां उसके काबू से बाहर है। इसलिए फौज के हाथ में कंट्रोल दिया जाए।


उस स्थिति में सेना क्षेत्र में कदम रखती है। ऐसे में इस तरह की मिलिट्री ड्रेस पहन कर कोई व्यक्ति अगर किसी सिविलियन क्षेत्र के चौराहे पर आकर ट्रैफिक मैनेजमेंट करने लगे और लाकडाउन का उल्लंघन करने वालों को वहीं सड़क पर सजा देने लगे तो इससे लोगों के दिमाग में यह बात आती है कि हो सकता है कि इंदौर की स्थिति इतनी बिगड़ गई हो की फौज को अपने हाथ में लेना पड़ा हो।


साथ ही जनता में भ्रम की स्थिति बन जाती है। जैसे ही मामला बढ़ा, हीरा नगर थाने ने उक्त तथाकथित फौजी को वहां से हटा दिया।


इस बारे में जब महू के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर आर एस डडवाल से बात हुई तो उन्होंने कहा कि किसी भी सिविल इलाके में सेना को नहीं लगाया गया है।


हम आपको कुछ बिंदुओं के बारे में बताना चाहते हैं जिनसे पता चलता है कि मामले में कुछ गड़बड़ है


* आर्मर्ड  रेजिमेंट जिसका एम्बब्लेम उसके कंधे पर लगा है, उस तरह की वर्दी फौजी सिपाही की नहीं होती है।


* जिस तरह की नेमप्लेट उस जवान ने अपनी जेब पर लगा रखा है, वैसी नेम प्लेट फौज में नहीं लगाई जाती है।


* जिस 81 आर्मर्ड रेजिमेंट का एंब्लेम उसके कंधे पर लगा है, वह रेजिमेंट पूरे मध्यप्रदेश में कहीं नहीं है तो ऐसे में उसकी वहां पर ड्यूटी लगना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।