ट्रंप की धमकी और भारत का झुकना- एक चर्चा

ट्रंप की धमकी और भारत का झुकना- एक चर्चा



पहला पक्ष.....



_डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तेवर में hydrochloroquine
को लेकर भारत को धमकी दी और जिसके कारण भारत को झुकना पड़ा उससे देश का अपमान हुआ है। भारत की संप्रभुता और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है।यह श्री नरेंद्र मोदी की तमाशा करने की शैली का नतीजा है।उन्हें विदेश नीति की जरा भी समझ नहीं है।चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने भी इसी तरह गुजरात के तमाशे के बाद अपने देश लौटकर पाकिस्तान का समर्थन देकर भारत को अपमानित किया था। श्री नरेंद्र मोदी कब समझेंगे कि वे गुजरात के तमाशेबाज मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भारत के प्रधानमंत्री हैं। उस भारत के जिसके महात्मा गांधी जैसे नेता हुए हैं जिन के निधन पर 126 देशों ने झंडा झुकाया था। यह ज्ञात मानव इतिहास की अभूतपूर्व घटना है कि दुनिया ने ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रीय शोक के रूप में श्रद्धांजलि दी जो किसी भी सरकारी पद पर नहीं रहा।मार्टिन लूथर किंग और नेलसन मंडेला ने भी महात्मा गांधी को अपनी प्रेरणा बताया था। बराक ओबामा तो गांधीजी से खूब प्रभावित थे ही डॉ मनमोहन सिंह वह भी अपना बड़ा भाई मान कर कई बार परामर्श लेते थे।
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दूसरा पक्ष......


- अतीत में भी भारत कई बार अपमानित हुआ है। 1947 में मोहम्मद अली जिन्ना की जिद के कारण 30   प्रतिशत भूभाग करीब 13 फीसदी आबादी को देना पड़ा। यहीं नहीं भारत को 55 करोड़ रुपए भी देने पड़े।


-1948 में कश्मीर का बड़ा हिस्सा और अक्साई चीन भारत के हाथ से निकल गया और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत को अपमानित होना पड़ा।


- 1962 में चीनी प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने भारत को धोखा दिया और हजारों किलोमीटर की भूमि हड़प ली। देश को इतना अपमानित होना पड़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अंतिम समय इतनी ग्लानि में डूबे की उनकी उसी निराशा में मृत्यु हो गई।


- 1965 का युद्ध जीतने के बाद। भारत, ताशकंद समझौते के नाम पर रूस विशेषकर, वारसा संधि के नेताओं के दबाव में घुटने टेकने पर मजबूर हुआ। देश की जनता से किसी संत जैसी श्रद्धा पाने वाले भारत के सबसे बड़े गांधीवादी नेता लाल बहादुर शास्त्री की आकस्मिक मृत्यु कैसे हुई और उस रहस्यमय दुखद मृत्यु की जांच किसके दबाव में नहीं होने दी गई इससे भी देश न केवल आहत हुआ बल्कि अपमानित भी हुआ।


- अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने कई बार भारत को धमकाया। रिचर्ड निक्सन और उनके बाद के उत्तराधिकारी भारत विशेषकर श्रीमती इंदिरा गांधी पर आरोप लगाते रहे की वह गुटनिरपेक्ष आंदोलन के नाम
 पर तत्कालीन सोवियत संघ की पिछलग्गू बनी हुई हैं। शीत युद्ध के उस दौर में अमेरिका भारत से इतना नाराज रहता था कम से कम दो - ढाई दशकों तक कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर नहीं आया।


- 1971 का युद्ध जीतने के बावजूद भारत को सोवियत संघ के तत्कालीन सर्वोच्च नेता लियोनिद ब्रेजनेव के दबाव में शिमला समझौता करना पड़ा। फील्ड मार्शल मानेकशॉ, जो उस समय जनरल यानी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे की सेना ने  ले.जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा की अगुवाई में पाकिस्तान के जनरल नियाजी की सेना के 93 हजार सैनिकों को
 आत्मसमर्पण के लिए मजबूर मजबूर किया। लेकिन मैदान में जीती जंग, भारत एक बार फिर टेबल पर हार गया और देश को यूं अपमानित होना पड़ा कि हाथ कुछ भी नहीं लगा।


- 1984 में भोपाल गैस कांड के लिए जिम्मेदार वारेन एंडरसन को केंद्र सरकार के दबाव में रहस्यमई ढंग से तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने खुद विमान में चढ़ाकर अमेरिका जाने दिया। यानी हजारों लोगों के हत्यारे एंडरसन को भारत को अपमानित होकर सेफ पैसेज देना पड़ा।


- पीवी नरसिम्हा राव सरकार के विदेश मंत्री माधव सिंह सोलंकी ने इटली के राजनयिक को एक रहस्यमई लिफाफा सौंपा। उस लिफाफे में क्या था और वह क्यों सौंपा गया इसके बारे में आज तक रहस्य बना हुआ है। पूर्व विदेश सचिव और डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार में एनएसए(राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) रहे स्वर्गीय जेएन दीक्षित ने उस घटना को भी देश की संप्रभुता को आहत करने वाली और अपमानित करने वाली घटना बताया था।
- स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के समय कंधार विमान अपहरण की एवज में आतंकवादी अजर मसूद को सेफ पैसेज देकर अपने विमान में बिठाकर भारतीय विदेश मंत्री जसवंत सिंह क्यों ले गया आज तक रहस्य  बना हुआ है। इस वाकये को भी भारत की संप्रभुता की दृष्टि से अपमानित करने वाली घटना माना गया है। हालांकि मोरारजी देसाई की सरकार में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई अत्यंत सफल विदेश मंत्री थे। अटल बिहारी वाजपेई बेहद गंभीर और ऐसे राजनेता थे जिनके बारे में वामपंथी और कांग्रेसी भी कहते थे  कि,राइट मैन इन इन रॉन्ग पार्टी।


 - सार यह है कि भारत जब तक आर्थिक महाशक्ति नहीं बनता, तब तक उसे अपमान सहना पड़ेगा। कोई भी देश शक्ति संपन्न उसके नागरिकों के राष्ट्रीय चरित्र, परिश्रम, और असंदिग्ध देशभक्ति और उद्यमशीलता के कारण बनता है। जाहिर है हम भारतीयों में इसका अभाव है। तभी तो हम 130 करोड़ का देश होने के बावजूद हर 4 वर्ष बाद होने वाले ओलंपिक प्रतियोगिता में पदक तालिका में भारत का स्थान ढूंढते रहते हैं। यानी जब तक हम शक्ति संपन्न नहीं होते तब तक हमें अपमान सहना होगा। श्री नरेंद्र मोदी ने तो लगातार 20 वर्ष बिना छुट्टी लिए कार्य कर के सारे भारत के लिए मिसाल पेश की है। अभी तो उनके नेतृत्व में ही देश सुरक्षित है ।



- लोककांत महूकर


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