कोरोना को लेकर "सोशल डिस्टेंस" शब्द का उपयोग किया जाना कहीं गलत तो नहीं?

 जब से कोरोना महामारी का कहर चीन से निकलकर धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैला, इससे बचने के लिए तमाम वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स ने बहुत सारे तरीके बताए।


इन्हीं तरीकों के आधार पर विभिन्न देशों की सरकारों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर लगातार एडवाइजरी जारी की गई। बहुत सारे सुझाव जनता को दिए गए और उनका प्रचार भी बहुत ही जबरदस्त तरीके से संचार के लगभग हर माध्यम से हुआ।


लोगों की डायलर टोन बदल दी गई और किसी भी सरकारी कार्यक्रम या खबर के साथ में कोरोना महामारी से बचने के उपायों के बारे में बताया जाने लगा। सबसे बड़ी चीज जो बार-बार बताई जा रही थी वह थी सोशल डिस्टेंसिंग यानी यानी सामाजिक दूरी बनाए रखना।


इसका आशय यह होता हैै कि लोग एक दूसरे से कम से कम 3 से 5 फीट की दूरी का अंतर रखें जिससे अगर किसी एक को बीमारी हो गई हो तो भी वह दूसरों में ना फैले। इस दूरी रखने के नियम को सोशल डिस्टेंसिंग कहा गया जिसका जोर शोर से प्रचार भी हुआ पर आज हम देखेंगे की क्या सरकार और प्रशासन द्वारा इस्तेमाल किया गया यह शब्द यह शब्द सही है? क्या इन शब्दों से सरकार का या चिकित्सा जगत का आशय है वही समाज में जा रहा है? या उसका कोई और मतलब निकल रहा है।


हमने और कुछ समाज शास्त्रियों ने इसका अध्ययन किया और पाया कि इसका नाम सोशल डिस्टेंसिंग के बजाय फिजिकल डिस्टेंसिंग होना चाहिए। क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग यानी कि सामाजिक दूरी और फिजिकल डिस्टेंस यानी एक दो व्यक्तियों के बीच में भौतिक दूरी।


जहां तक कोरोना वायरस के फैलने का सवाल है तो उसके लिए भौतिक दूरी जरूरी है, सामाजिक दूरी से उसका कोई लेना-देना नहीं है। पर हमको लगातार सामाजिक दूरी रखने के लिए कहा जाता है जिसका मतलब यह होता है कि समाज के विभिन्न घटक एक दूसरे से कोई संपर्क ना रखें और दूरी बनाए रखें।


जबकि कोरोना से निपटने के लिए सामाजिक दूरी नहीं, भौतिक दूरी की जरूरत है क्योंकि भौतिक रूप से पास आने पर या छूने पर यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है।


कोई भी बीमारी हो या किसी भी तरह की आपदा, समाज मिलकर अगर उस से लड़ता है तो बड़ी से बड़ी समस्या यह बड़ी से बड़ी आपदा छोटी पड़ जाती है। यही बात कोरोनावायरस के बारे में भी सही निकलेगी बस अब जरूरत है तो इन शब्दों को बदलने की क्योंकि समाज के विभिन्न घटकों की दूरी बनाने की बजाए मिलजुल कर तालमेल के साथ काम करना होगा और जरूरत सिर्फ इस बात की रखनी है कि है कि एक दूसरे से हम भौतिक दूरी बनाए रखें।