उमरिया की जोधईया बाई विश्व में प्राप्त कर चुकी हैं ख्याति, राहुल गांधी भी है प्रशंसक













 











 









 







उमरिया की जोधईया बाई विश्व में प्राप्त कर चुकी हैं ख्याति, राहुल गांधी भी है प्रशंसक


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जोधईया के संघर्ष भरा जीवन की कहानी





उमरिया की जोधईया बाई विश्व में प्राप्त कर चुकी हैं ख्याति, राहुल गांधी भी है प्रशंसक






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विकास शुक्ला की स्पेशल रिपोर्ट
उमरिया। मंजिल उन्हें मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है। किसी शायर की यह लाइनें बहुत लोगों ने पढ़ी और सुनी होगी, लेकिन उमरिया जिले के लोढ़ा गांव की जोधईया बाई ने इसे खूब ठीक से समझा और साबित कर यह बता दिया कि जीवन के हर पड़ाव में कामयाबी पाई जा सकती है और हौसले के दम पर आसमां भी हासिल हो सकता है। दृढ़ संकल्प और हौसलों की मिसाल बनी स्ट्रांग लेडी जोधईया बाई इंटरनेशनल ख्याति प्राप्त महिला हैं जिन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में कष्टों और दुःखों के हर पड़ाव को पार कर आज अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।
सफलता की राह में शिक्षा नहीं बना रोड़ा 
आदिवासी बाहुल्य जिला उमरिया की एक छोटे से गांव की रहने वाली जोधईया बाई का जीवन बहुत ही संघर्षशील रहा। वहीं हम इनके योग्यता को जानें तो यह अनपढ़ हैं लेकिन इंनके हौसलें, लग्न और कड़ी मेहनत ने यह साबित कर दिया कि यदि नाम बनाना है तो काम करो। आदिवासी लोक कलाओं से लेकर वास्तविक जीवन और कई अन्य तरह की चित्रकारी में शौख रखने वाली जोधईया बाई ने अपने चित्रकारी के निपुणता के कारण विदेश में नाम रोशन किया है।
जनगण तश्वीरखाना से मिला मौका 
जोधईया बाई की हम बात करें तो जिस उम्र में लोग लाठी सहारा लेकर चलते है उस उम्र में लगभग 81 वर्ष की जोधईया बाई बैगा हाथों में ब्रश पकड़ कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं, अपने इस क़ामयाबी के पीछे वे जनगण तश्वीरखाना के संचालक आशीष स्वामी को अपना गुरु मानती हैं और बताती हैं कि इन्होंने ही उनके अंदर छीपे प्रतिभा को पहचान कर आज यह कामयाबी दिलाई है।
इटली के मिलान में लग चुकी पेंटिंग
मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले के लोढ़ा गांव की रहने वाली जोधईया बाई द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स की इटली के मिलान शहर में प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसके बाद जोधईया बाई की बेहद प्रशंषा हुई थी।
राहुल गांधी कर चुके सराहना 
कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी फेसबुक वॉल पर जोधईया बाई की फोटो लगाकर उनके द्वारा चित्रकला सीखकर शोहरत हासिल करने के जज्बे को सलाम किया भी किया था, जिसके बाद जोधईया बाई और आदिवासियों ने बेहद खुशी जाहिर की थी।
पति के मृत्यु उपरांत शुरु की पेटिंग 
जोधईया बाई का रंगों के साथ नाता लगभग 41वर्षों का हैं। जोधईया बाई के अनुसार उनके पति के निधन के बाद उन्होंने रंगों की मदद से कागज पर विभिन्न तरह की आकृतियां बनानी शुरु की, वहीं जोधइया ने पेंटिंग्स बनाने के लिए भारत के कई हिस्सों का दौरा भी किया हैं।
मजदूरी में बिता जीवन 
हम बता दें कि जोधईया बाई अपने जीवन में भले ही कभी भी स्कूल नही गई हों, लेकिन अपने हुनर को उन्होंने पहचान कर उससे अपने जीवन को एक नई दिशा दी हैं, इतना ही नही पति के निधन के बाद परिवार की आर्थिक हालात भी अच्छी नही थी जिस कारण उनके जीवन का अधिकतर हिस्सा मजदूरी में ही निकल गया और इसी दौरान जोधईया ने पेंटिंग बनानी शुरु की।













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