इंदौर की कनिका राठौर ने पूरा किया सर्द हिमालय में बर्फ से ढकी दुर्गम घाटियों का अकेले सफर

कनिका राठौर जो कि इंदौर की एडवेंचर गर्ल हैं, ने इंदौर और मध्य प्रदेश का नाम उस समय रोशन कर दिया जब उन्होंने हिमालय पर्वत श्रंखला के बर्फ से ढके हुए दुर्गम इलाकों का सफर अकेले तय किया और इस दौरान दुनिया की सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस, दुनिया के सबसे ऊंचाई पर बने गांव, पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया की दूसरी सबसे अच्छी जगह के साथ-साथ भारत की सबसे पुरानी बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री और हिमालय की अजंता एलोरा कहीं जाने वाले इलाके वाला स्थान समेत अनेक स्थानों का सफर किया I



कल इंदौर वापस लौटी कनिका शिमला होते हुए कजा, शीशम, हिक्किम, रिकांगपिओ, बीर-बिलिंग, ताबू, की आदि स्थानों पर पहुंची और वहां से वापस शिमला, दिल्ली होते हुए इंदौर वापस आ गई I



अगर किसी आम आदमी को यह बताया जाए तो वह यह कहेगा कि यह कौन सी बड़ी बात है, इन स्थानों पर तो बहुत से पर्यटक जाते हैं I पर हम आपको बता दें कि कनिका का सफर आम नहीं बल्कि बहुत ही खास सफर था I खास इसलिए क्योंकि पर्यटक तब इन स्थानों पर जाते हैं जब गर्मी का मौसम होता है और सारे रास्ते खुले होते हैं I साथ ही भरपूर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ठहरने के लिए धर्मशालाएं और होटल भी बहुतायत में होते हैं I



जिस समय में कनिका वहां पर थी उस समय सारे रास्ते बंद थे क्योंकि वह बर्फ से ढके हुए थे I जहां पर बस या कार तो क्या मोटरसाइकिल भी नहीं चलती है I अकेली लड़की और बर्फीले रास्ते पर पैदल चलकर कभी दुनिया के सबसे ऊंचे गांव कॉमिक पहुंचना तो कभी दुनिया के सबसे ऊंचाई पर बने पोस्ट ऑफिस जाकर फोटो क्लिक करना, कभी भारत की सबसे पुरानी बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री पहुंचना तो कजा से की तक का सफर पैदल तय करना I यह सब कोई मामूली एडवेंचरिस्ट नहीं कर सकता है बल्कि इसके लिए शारीरिक रूप से मजबूत होना जितना जरूरी है, उससे भी अधिक जरूरी है मेंटल और साइक्लोजिकल रूप से मजबूत होना I



इंदौर से पठानकोट तक का ट्रेन का सफर और उसके बाद धर्मशाला, मैक्लोडगंज, बीर-बिलिंग, शिमला, रिकांगपिओ होते हुए विका जा पहुंची और कजा को बेस बनाकर अलग-अलग दिशाओं में स्थित दुर्गम इलाकों का सफर अकेले तय करना वाकई तारीफ के काबिल है और कनिका कि यह कामयाबी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हमारे द्वारा लोगों तक पहुंच रही है, यह भी एक बहुत ही अच्छा इत्तेफाक है I



कनिका ने बताया कि गर्मियों में तो लाखों लोग वहां जाते हैं पर वर्ष के बाकी हिस्से में वहां के लोगों की आय का कोई स्रोत नहीं होता है I इसलिए उन्होंने इस सफर के लिए यह समय चुना, साथ ही अपने पिता के बारे में बताया कि उनका फुल सपोर्ट है तभी तो वह इतने बड़े-बड़े काम करवाती हैं I


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