सरकार को केंद्र से डीजीपी के मामले में फिर लगा झटका

*सरकार को केंद्र से डीजीपी के मामले में फिर लगा झटका*



भोपाल । प्रदेश की कमलनाथ सरकार को एक बार फिर केंद्र ने झटका दिया है। लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए पत्र को अमान्य कर दिया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि डीजीपी के लिए भेजे गए तीन नामों के पैनल को नियम-प्रक्रिया के तहत ही तैयार किया गया है। इसमें नियम विरुद्ध कुछ नहीं है। इस कारण इसे नहीं बदला जाएगा। किसी भी अधिकारी से फोन पर अथवा ई-मेल से भी सहमति ली जा सकती है, अथवा बिना सहमति लिए भी संबंधित राज्यों के अधिकारियों का नाम पैनल में जोड़ा जा सकता है, बशर्ते उक्त अधिकारी का नाम नियमानुसार पैनल में आ रहा हो। यूपीएससी के पत्र के बाद मध्यप्रदेश के डीजीपी वीके सिंह को बदलने को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।


*वीके जौहरी को लेकर उठा था मामला*
जानकारी के अनुसार, गत सात फरवरी को सचिव गृह राजेश जैन ने यूपीएससी को लिखे पत्र में कहा था कि 18 नवंबर 2019 को आपके द्वारा जो पैनल भेजा गया था, उसमें वीके जौहरी का भी नाम शामिल है, जबकि जौहरी ने इस पद के लिए अपनी लिखित स्वीकृति प्रदान नहीं की थी। बैठक के पूर्व भी यूपीएससी को दो पत्र लिखे गए थे। राज्य सरकार के पत्र में कहा गया था कि जौहरी का नाम पैनल में शामिल करना संघ लोकसेवा आयोग नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है। अत: राज्य सरकार इसे अमान्य करती है। डीजीपी के लिए बने पैनल में वीके सिंह, विवेक जौहरी और एमएस गुप्ता के नाम थे। जौहरी वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर भारत सरकार में डीजी बीएएसएफ के पद पर पदस्थ हैं।