संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए स्वयं की शादी में सारे काम संस्कृत भाषा में

महू। शहर में संभवता यह पहला ऐसा विवाह होगा, जिसमें शादी के कार्ड से लेकर शादी में आए मेहमानों व ईष्टजनों के लिए दिए भोजन में बनाए गए व्यंजनों के नाम भी संस्कृत में लिखे गए। साथ ही मेहमानों के लिए प्रवेशद्वार पर लगाए गए हार्दिक अभिनंदन के बैनर पर भी संस्कृत भाषा में ही ;जोशीपरिवारः भवतां हार्दं स्वागतं करोति आपका हार्दिक अभिनंदन लिखा गया।


यह सबकुछ संस्कृत भाषा प्रेमी गुजरखेड़ा निवासी लोकेश जोशी संस्कृत भारती पूर्व विस्तारक के विवाह में हुआ। लोकेश जोशी संस्कृत भाषा के इतने प्रेमी है कि वे अपने दोस्तों से लेकर मिलने जुलने वालों से भी अधिकांश संस्कृत भाष में बातचीत करते है साथ ही सभी को समझाते भी है कि संस्कृत भाषा सिखो यह बहुत ही सरल और सटीक भाषा है। साथ ही वे शहर व आसपास के विभिन्न स्कूलों में निःशुल्क संस्कृत शिविरों का आयोजन कर चुके है।


व्यंजनों के नाम संस्कृत में


इस विवाह में गुलाब जामुन - कृष्णगोलकम्, मुंग का हलवा - मुग्धसंयाव, मैथी मटर मलाई - मैथीहरेणुनवनीतं, स्टीम राईस - वाष्पोदनम्, तवा पराठा - ऋजीषप्ररोटिका, मैथी की पुडी - मैथीपुरिका, कड़ाई पनीर - भ्राष्टक्षीरजम्, नुडल्स


बाल्यावस्था से संस्कृतप्रेमी


5वी से संस्कृत पढ रहे है जिसके लिए इन्होने धामनोद राजराजेश्वरीधाम में दो वर्ष संस्कृत का अध्ययन किया। जिसके संस्कृत महाविालय रामबाग इंदौर में शास्त्री, आचार्य की पढ़ाई की, उसी बीच संस्कृत भारती संगठन से जुडे। संगठन में पांच वर्ष तक लोगों को संस्कृत पढ़ाई इस दौरान देशभर में जहां भी संस्कृत शिविर का आयोजन हुआ वह पहुंचकर हिस्सा लिया।