म.प्र. पुलिस की घोर लापरवाही, निर्दोष दलित आदिवासी वृद्ध को हत्या के आरोप में भेज दिया जेल, हाई कोर्ट ने दिए सरकार को 5 लाख मुआवजा देने व एसडीओपी व अन्य पर अवमानना का केस दर्ज करने के आदेश

*म.प्र. पुलिस की घोर लापरवाही, निर्दोष दलित आदिवासी वृद्ध को हत्या के आरोप में भेज दिया जेल, हाई कोर्ट ने दिए सरकार को 5 लाख मुआवजा देने व एसडीओपी व अन्य पर अवमानना का केस दर्ज करने के आदेश*


म.प्र की धार जिले की पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है जिसमे उसने एक निर्दोष दलित वृद्ध को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हाई कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्दोष को तत्काल जेल से रिहा करने व मप्र सरकार को उसे तीस दिन में 5 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं वही सम्बंधित ,कूक्षी, एसडीओपी मनोहर सिंह बारिया व अन्य पर अवमानना का केस दर्ज करने के आदेश भी दिए है।
जस्टिस एससी शर्मा व जस्टिस शैलेन्द्र शुक्ला की डिवीजन बेंच ने  कमलेश की ओर से एडवोकेट देवेंद्र चौहान व सचिन पटेल द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर उक्त आदेश दिए। 


*मामला बाग के ग्राम देवदा का*


मामला इस प्रकार है धार जिले की जनपद पंचायत बाग की ग्राम पंचायत देवदा के लिमखेड़ा फलिये के रामसिह नामक व्यक्ति जिसकी दो पत्निया थी दोनो पत्नियो से एक एक बेटे का जन्म हुआ था । एक को बड़ा हुस्ना तो दुसरे को सिर्फ हूसेन कहा जाता था । जिसमे बड़े हुस्ना को एक व्यक्ति की हत्या के आरोप मे सजा हुई थी 1985 मे उसी सजा के चलते हुस्ना पेरोल पर अपने घर आया ओर वही से फरार हो गया 10 सितंबर 2016 को उसकी मोत हो गई थी । जिसकी सुचना परिवार द्वारा जेल या पुलिस विभाग को नही दी थी । तीन वर्ष बाद 18 अक्टुम्बर 2019 को पुलिस सोतेले भाई हुस्ना के घर पहुची उसे गिरफ्तार कर लिया 68 वर्ष के हुस्ना ओर उसके बेटे कमलेश ने लाख यह साबित करना चाहा की यह हुस्ना नही हुसेन हे । परंतु पुलिस ने एक नही सुनी ओर उसे सीधे जेल भेज दिया । इस सबंध मे बेटे कमलेश ने हाईकोर्ट मे बंदी प्रत्यक्षीणकरण याचिका दायर की कोर्ट मे बाकायदा आरोपी हुस्ना की मोत का प्रमाण पत्र भी पेश किया साथ ही दोनो का एक ही नाम होने का प्रमाण पत्र भी पेश किया कोर्ट मे जिस पर कोर्ट ने नोटिस जारी किए तो पुलिस व जेल प्रशासन ने शपथ पत्र दिया की जिसे पकड़ा हे वही असली आरोपी हे ।।।।।। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में उक्त मामले मे प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिए कि वह इस मामले की पूरी जांच करें और बायोमेडिकल व अन्य जांच के आधार पर रिपोर्ट पेश करें। प्रमुख सचिव द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि जो जेल में बंद किया गया वह हत्या का आरोपी नहीं है, उसकी मौत हो चुकी है। पुलिस ने उसकी जगह एक निर्दोष को हत्या के आरोप में जेल में बंद कर दिया। यह बात सामने आने के बाद कोर्ट ने उक्त आदेश दिए।


*स्थानिय पुलिस विस्तार से जाँच करती तो निर्दोस जेल नही जाता।*


इस सबंध मे हुस्ना के बेटे कमलेश एवं परिजनो ने बताया की हम पुलिस को हर प्रमाण दे रहे थे लेकीन हमारी किसी ने नही सुनी ओर पुलिस ने भी सही जाँच करने मे कोई रुची नही दिखाई अगर स्थानिय पुलिस प्रशासन सही व्यक्ति की जाँच करने मे रुची दिखाती तो मेरे पिता जी चार माह छः दिन की जेल नही भुगतकर आते हमारे पिताजी जेल जाने के बाद पुरा परिवार परेशान रहा ओर नही कोई काम काज कर पाये क्योकी हमे तो पता था वो निर्दोष हे अगर पुलिस तह तक जाती तो बड़े हुस्ना की दो बेटीया भी थी उस्से भी पुछताछ कर के असली आरोपी का पता लगा सकती थी । 


*गुजरात के मोरवी जेल से भी लाये प्रमाण*


परिजनो ने बताया की हमने हमारे पिताजी को निर्दोष साबित करने के लिये हर जतन किये बड़ा हुस्ना गुजरात की मोरवी जेल मे भी बंद था वहा से भी उसकी निनानी के कुछ प्रमाण लाये ओर वही से पता की जिसे बंद किया गया हे वह हुस्ना नही हे । 


*परिजनो ने न्यायालय कै फेसले का आभार माना।*


हुसेन की रिहाई ओर निर्दोष साबित होने के बाद परिजनो मे खुशी छा गयी ओर इस सही फेसले पर उन्होने न्यायालय का आभार भी माना । इस दोरान जनपद अध्यक्ष  प्रतिनिधि भेरुसिह अनारे एवं परिजनो ने मांग की हे की पुलिस की इस लापरवाही पर दोषियो पर कड़ी कार्यवाही भी होना चाहिये ताकी द्वारा इस प्रकार कोइ निर्दोष जेल तक नही पहुचे ।