बस बहुत हुआ इंद्रेशजी, समय आ गया है कि आप अपनी जुबान पर ताला लगाएँ

 इंद्रेश कुमार से इमाम-ए-हिन्द विषय पर कुछ सीधे सवाल पूछता है भारत 

आपने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच बनाया, संपूर्ण समाज ने आपका स्वागत किया और मंच के मुस्लिम सदस्यों के साथ साथ सनातन लोगों ने भी आपको अपने सिर पर बिठाया क्योंकि उनको लगा कि आप दोनों वर्गों के बीच सामंजस्य स्थापित करना चाहते हैं. उनकी यह सोच सही भी लगती है क्योंकि विविधता भरे दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र में अगर किसी बात की जरूरत है तू वह है सामंजस्य, अनेकता में एकता, सौहार्द, परस्पर विश्वास और इंसानियत की मजबूती की जो समय के इस प्रवाह में लगभग गुम हो गए.

यह तो हुई वह बात जिसने इंद्रेशजी को एक महान इंसान बनाया पर कहते हैं की ज़रूरत से अधिक प्रसिद्धि मिलना भी कभी-कभी घातक हो जाता है और शायद यही हुआ है इंद्रेश जी के साथ भी.  इस भूमिका के साथ ही हम आ जते हैं सीधे उस विषय पर जो आज पूरे देश में एक बर्निंग टॉपिक है और जिस कारण से इंद्रेशजी की भयंकर फजीहत भी हो रही है. 

दरअसल, महाराष्ट्र क्षेत्र की मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की इकाई ने गत दिनों एक कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें इंद्रेशजी मुख्य वक्ता थे. इस कार्यक्रम को उद्देश इस नजरिए को समझना था कि भगवान राम दरअसल इमाम ए हिंद यानी हिंदुस्तान के सबसे बड़ी इमाम हैं. इसी पर बोलते हुए इंद्रेश जी ने भी मंच के इस नजरिए का समर्थन किया था.

आम लोगों को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगा और उन्होंने इस बात का यह सोचकर विरोध नहीं किया क्योंकि इंद्रेशजी ने कहा था और उन पर समाज का काफी भरोसा है, इसलिए जिम्मेदारी उनकी ही थी कि लोगों के विश्वास को वह और अधिक मजबूत करें.

 अब देखते हैं कि राम है इमाम ए हिंद वाले नैरेटिव में गलत क्या है?

पहला बिंदु तो यह है कि सनातन मान्यता के अनुसार भगवान राम ने मर्यादा की राह दिखाने के लिए इस धरती पर जन्म लिया था. वह स्वयं परमेश्वर यानि भगवान है, ऐसे में उनको इमाम कहना इसलिए गलत है कि इमाम किसी मस्जिद के इमाम से लेकर दिल्ली वाले शाही इमाम तक हो सकते हैं जो अपने अपने ओहदे के अनुसार किसी मस्जिद के इमाम होते हैं. वैसे तो सनातन दर्शन से किसी और मत या पंथ को कंपेयर करना ठीक बात नहीं है पर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भगवान राम को इमाम कहना उन्हें ईश्वर से पुजारी बनाने जैसा है. इसलिए यह बात सर्वथा गलत है, यह आप समझ ही गए होंगे.

इस मामले में दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि जाकिर नायक जैसे लोगों की विस्तारवादी नीति के चलते दूसरे धर्मों के श्रद्धा बिंदुओं को अंडरमाइन करना यानी उनको एक नैरेटिव चलाकर अपने श्रद्धा बिंदु से निम्न स्तर पर रखना उनका उद्देश्य होता है. इसका असर long-term होता है और इसके कारण नई पीढ़ी जो वामपंथी तत्वों के द्वारा फिल्मों टीवी सीरियल और मनोरंजन के अन्य साधनों से प्रभावित होकर अपने धर्म से दूर होते जा रहे हैं, उन पर सबसे अधिक पड़ता है. वामपंथ और विघटनकारी तत्वों की एक सोची समझी रणनीति के कारण भारत में Atheists की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. हालांकि पिछले 5 वर्षों में कुछ जनजागृति आई है, ऐसा हम सब महसूस कर सकते हैं. भगवान राम को इमाम है हिंद कहना भी इसी तरह का कार्य है, ऐसा साफ-साफ लगता है.

इस बारे में बातें तो बहुत सी हैं पर अपना यह वीडियो हम यहीं समाप्त करते हैं और आप सब से अपील करते हैं कि चाहे इंद्रेश कुमार हो या कोई और, जब भी आपको लगे कि कोई आपकी आस्था, आपके विश्वास पर आघात कर रहा है तो तुरंत आवाज उठाइए और ईश्वर की कृपा से सोशल मीडिया से अच्छा कोई और हथियार ही नहीं है, इस तरह की बातों के लिए!

वंदे भारत! जय श्री राम!