कोरोना महामारी के दौर में काव्य गोष्ठी भी हुई ऑनलाइन, कोदरिया गांव में हुई यह गोष्टी

साहित्य मित्र मंडल कोदरिया की आनलाईन काव्य गोष्ठी संपन्न हुई



साहित्य मित्र मंडल कोदरिया की आनलाइन काव्य गोष्ठी सोमवार की शाम को संपन्न हुई । कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ संजय श्रीवास्तव, मुख्य अतिथि धीरेन्द्र जोशी एवं विशेष अतिथि राजेश बाबू भंडारी के आतिथ्य में राधेश्याम गोयल , रमेश आंजना , गगन खरे , पायल परदेसी , दीपक जैसवानी , संजय देशवाली एवं द्रोणाचार्य दुबे ने विविध विषयों पर अपने घरों से ही आनलाईन कविता पाठ किया । कार्यक्रम का संचालन कवि द्रोणाचार्य दुबे ने किया ।
प्रमुख कवियों रचनाऐं इस प्रकार रही
डॉ संजय श्रीवास्तव - मौत का डर सबकी आंखों में सब खुदा तलाशने लगे ।(ग़ज़ल)
श्री राजेश भंडारी - जिनका घर में डोकरा डोकरी जगे नी भाटा की मूरत की जगे बनावे हो लोग । (मालवी रचना)
श्री धीरेन्द्र जोशी - चाइना चाइना अब तो समझ आये ना । (हास्य रचना ) 
श्री राधेश्याम गोयल -कोरो नी आयो ये कोरोणा कोरोणा । (मालवी रचना)
श्री रमेश आंजनाजी - हाहाकार मचईने सबके नाच नचईने सबके खईगियो कोरोणा कोरोणा ।
श्रीमती पायल परदेसी -बेटा बेटी में तुम यूं न करो अंतर । (गीत )
श्री गगन खरे - चीख चीखकर कह रहे गली मोहल्ला सारा वतन ।
श्री दीपक जेसवानी - मैं गीत ऐसा गाऊं शब्दों को यूं सजाऊं । (जीवन गीत)
श्री संजय देशवाली -अरे ओ मानव जरा थाम ले कदम मौत राहों में है खड़ी ।
श्री द्रोणाचार्य दुबे - घर में रहो मौत को मत दो निमंत्रण ।