काम की अधिकता थी या डॉक्टरों ने इंसानी जिंदगी की कीमत नहीं समझी, पर आज एक जान चली गई

 रीवा के रहने वाले 39 वर्षीय कृष्णा तिवारी के सीने में हल्का दर्द हुआ तो उन्होंने अपने परिवार को इसके बारे में बताया। परिवार ने आस-पड़ोस के लोगों को बताया तो एक पड़ोसी मित्र उन्हें लेकर पहले पीथमपुर के दो अस्पतालों में गया पर उन दोनों अस्पतालों ने कृष्णा को देखने से ही मना कर दिया।


तब जाकर वे उसे लेकर द फेमस चैरिटेबल हॉस्पिटल पहुंचे जहां पर हॉस्पिटल स्टाफ ने कृष्णा को स्ट्रेचर पर लिया।उनका ईसीजी किया गया, साथ ही अन्य जरूरी टेस्ट किए गए और जैसे ही स्टाफ ने ईसीजी की रिपोर्ट की जानकारी अस्पताल के मालिक डॉक्टर राजेश लेखी को दी तो डॉक्टर लेखी ने उनको बताया की मरीज को हार्ट अटैक आया है। और उनके कहे अनुसार हॉस्पिटल स्टाफ ने कृष्णा को एक गोली जीभ के नीचे रखने के लिए दी और एक इंजेक्शन दे दिया, साथ ही तुरंत एंबुलेंस में उसे महू के मध्यभारत अस्पताल पहुंचा दिया।  क्योंकि पीतमपुर में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।


मध्य भारत अस्पताल में ड्यूटी पर जो डॉक्टर थे उन्होंने उसे देखा और देखते ही कह दिया कि इनकी स्थिति बहुत नाजुक है, इन्हें तुरंत प्रशांति अस्पताल ले जाना पड़ेगा।


एंबुलेंस के ड्राइवर ने गाड़ी को प्रशांति हॉस्पिटल की ओर मोड़ दिया जबकि उसे मालूम था कि प्रशांति हॉस्पिटल को कोरोना के लिए आइसोलेशन सेंटर और ट्रीटमेंट के लिए स्थानीय प्रशासन ने तैयार किया है। ऐसे में किसी हार्ट पेशेंट का इलाज तो वहां हो ही नहीं सकता था, फिर भी एंबुलेंस प्रशांति अस्पताल पहुंची और वहां पर वही हुआ जिसका ड्राइवर को डर था।


अस्पताल वालों ने कृष्णा को अस्पताल के अंदर तो लिया ही नहीं, साथ ही किसी भी डॉक्टर ने या किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने यह जहमत नहीं उठाई कि वे उसे कुछ प्रारंभिक उपचार दें जिससे कि उसकी जान बच जाए और वह इंदौर तक पहुंच सके।


वही हुआ जिसका डर था और उसकी मृत्यु एंबुलेंस में ही हो गई। इसके बाद एंबुलेंस ड्राइवर नेे प्रशांति अस्पताल केे डॉक्टरों से कहा कि चूंकि मरीज की मृत्यु अस्पताल प्रांगण में हुई है, इस कारण से उसकी मृत्यु के कागजात तैयार कर दे, जैसा कि आमतौर पर किसी भी अस्पताल द्वारा किया जाता है।


पर मानवता उस समय तार-तार हो गई  और भावनाओं की बलि उस समय चढ़ गई जब प्रशांति अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस में 2 घंटे तक लाश पड़ी रही पर उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं की। हार कर एंबुलेंस लेकर ड्राइवर पीथमपुर की छत्रछाया कॉलोनी स्थित कृष्णा तिवारी के घर पहुंच गया और परिवार वालों को उनका शव सुपुर्द कर दिया।


छत्रछाया कॉलोनी में भी एक अजीब सी स्थिति बन गई जब जैसे ही आसपास के लोगों को पता चला कि उनके पड़ोसी की मृत्यु हो चुकी है तो उस गली में भीड़ लग गई और कोरोना वायरस के चलते जिस सोशल डिस्टेंसिंग की बात बार-बार कही जा रही है और सरकार तथा प्रशासनिक अधिकारी लगातार जिस पर जोर दे रहे हैं, उसका बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया।


उसी स्थिति में किसी ने पुलिस को खबर की तब एक जवान पहुंचा और उसने लोगों को घर के अंदर किया।