प्रदेश की जनता को फिर लगने वाला है “करंट”

भोपाल। प्रदेश की जनता को एक बार फिर बिजली का झटका लग सकता है। दरअसल, विद्युत वितरण कंपनियों ने अपने घाटे का हवाला देकर मप्र विद्युत नियामक आयोग के पास याचिका दाखिल की है। अब इस पर आयोग को सुनवाई करना है। जानकारों का कहना है कि यदि निर्णय कंपनी के पक्ष में हुआ तो बिजली के दाम में बेतहाशा इजाफा हो सकता है। मप्र में बिजली वितरण कंपनियों की हालत बेहद खराब है। आर्थिकतौर पर कंपनियों को हर साल हजारों करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले तीन साल के आंकड़ों में ही कंपनी ने 19 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा होने का दावा किया है। इसकी भरपाई अब जनता की जेब से करने की तैयारी है। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से वित्तीय वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 की याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दायर की गई है। दरअसल कंपनी प्रस्तावित आकलन के बाद अंतिम आय-व्यय का ब्योरा तैयार करती है। इसमें नुकसान होने पर कंपनी आगामी सालों में इसकी भरपाई के लिए आयोग के पास याचिका दायर करती है। आयोग सुनवाई के दौरान कंपनी के व्यय और विभिन्न परिस्थितियों को देखते हुए फैसला करता है। कई बार मांगी गई राशि का कुछ अंश ही घाटे में मान्य करते हुए इसे वसूलने की इजाजत दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में बिजली कंपनी को करीब 5156 करोड़ रुपए की हानि हुई है। वहीं 2015-16 में हानि 7156 करोड़ पहुंच गई। वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 में बिजली से हानि 7 हजार करोड़ के आसपास हुई है। कंपनी ने इसके बाद में वित्तीय वर्षो में हुए घाटे का आकलन अभी तक आयोग को नहीं भेजा है।तो मुश्किल होगी बिजली आपूर्ति बिजली कंपनी अपने घाटे की भरपाई उपभोक्ता से करती है। इसके लिए बिजली के दाम में बढ़ोतरी एक विकल्प है। चाहे तो सरकार भी वित्तीय घाटे की भरपाई अपने स्तर पर कर सकती है। कंपनी को घाटे की भरपाई नहीं हुई तो उसे वितरण का काम करना मुश्किल होगा। ऐसे में आयोग को भी घाटे के संदर्भ में फैसला करना होगा। जाहिर है इसके लिए कंपनी को आयोग से अनुमति लेकर बिजली की दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर करवाना होगा।खरीदी में 4 हजार करोड़ की फिजूलखर्ची  बिजली मामलों के विशेषज्ञ सेवानिवृत्त अभियंता राजेन्द्र अग्रवाल के मुताबिक हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपए की फिजूलखर्ची बिजली खरीदी में हो रही है। निजी कंपनियों को लाभ देने के लिए बिना बिजली खरीदे ही करोड़ों रुपए का भुगतान हो रहा है। ये सारा खेल कमीशन के लिए होता है। उनके मुताबिक कई पावर प्लांट से बिजली खरीदी के करार किए गए। जिन्हें बिना बिजली लिए ही करोड़ों रुपए का भुगतान करना पड़ता है। कांग्रेस सरकार को इन एग्रीमेंट को निरस्त करना चाहिए।मप्र विद्युत नियामक आयोग के पास तीन ट्रृ-अप पिटीशन दायर की गई हैं। हर साल की अलग पिटीशन दायर हुई हैं जिसमें अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।