माननीय उच्च न्यायालय संज्ञान मे लेवे

*माननीय उच्च न्याया--- -लय संज्ञान मे लेवे* :- *विधुतअधिनियम की धारा 56/2 के अनुसार :-* इस धारा के अधीन किसी उपभोक्ता से शोध्य कोई राशि उस तारीख से 2 वर्ष कीअवधि के पश्चात तब तक वसूल नही की जावेगी जब ऐसी राशि पहली बार देय हुई थी,जब तक की ऐसी राशि प्रदाय की गयी विधुत के प्रभारो के बकाया के रुप मे लगातार वसूलनीय दर्शित नही की गई हो, ओर अनुज्ञप्तिधारी विधुत के प्रदाय को नही काटेगा ।
 विधुत अधिनियम मे स्पष्ट उल्लेख होने के बाद भी बिजली विभाग लोक अदालत का उल्लेख किये गये प्रिलिटिगेश्न सूचना पत्र जारी करता है जो राशि वसूली योग्य नही है ।
सूचना पत्र मे लोक अदालत का नाम होने से लोगो मे भय पेदा होता है, एवं कई उपभोक्ता ऐसी राशि का भुगतान कर देते है ।
माननीय उच्च न्यायालय से निवेदन है, ऐसे समस्त प्रकरणो की राशि उपभोक्ता को वापस दिलायी जावे,जो लोक अदालत के सूचना पत्र के माध्यम से कोर्ट मे टेबल लगा कर या सूचना पत्र के आधार पर आफिस मे बैठ कर वसूली की गयी है ।
अगर माननीय उच्च न्यायालय ऐसे सूचना पत्र एवं ऐसी वसूली पर रोक नही लगाता है, तो लोगो का न्याय के प्रति विश्वास खत्म हो जावेगा , साथ ही विधुत कम्पनी के ऐसे अधिकारीयो को भी दण्डित करे जो वसूली योग्य राशि नही है, ऐसे राशि के सूचना पत्रो मे लोक अदालत नाम का उपयोग कर रहै है ।




*संजय अग्रवाल उपभोक्ता हित प्रहरी,जिला उपाध्यक्ष अ.भा.ग्राहक पंचायत महू ।*