बड़ौदा राजपरिवार ने की मोदी और सिंधिया के बीच मध्यस्थता

भोपाल. मध्य प्रदेश में राजनीतिक घटनाक्रम का खुलासा होते ही सिंधिया को मनाने के लिए सचिन पायलट को भेजा गया। मिलिंद देवड़ा से भी बात कराई गई। बताया जा रहा है कि कमलनाथ ने भी सिंधिया से मिलने की पेशकश की, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। सिंधिया ने खेमे के मंत्रियों के साथ मीटिंग कर आगे की रणनीति तय की। इसी में हुए फैसले के आधार पर विधायकों की संख्या बढ़ाई गई। सूत्रों का दावा है कि उनके साथ 21 विधायक हैं। इधर, जब दिल्ली में कोई हल नहीं निकला तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने कमलनाथ को भोपाल जाकर हल ढूंढने के निर्देश दिए। आज माधवराव सिंधिया की 75वीं जयंती है। इस मौके पर ज्योतिरादित्य बड़ा ऐलान कर सकते हैं।


वे तीन दिन का दौरा एक दिन में ही खत्म कर विवेक तन्खा को लेकर भोपाल लौट आए। दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, सुरेश पचौरी को बुलाया। कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। सज्जन सिंह वर्मा ने सुझाव दिया कि सभी मंत्री इस्तीफे दें, ताकि नाराज विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का मौका मिले। मंत्रियों ने अपने इस्तीफे दे दिए, लेकिन कमलनाथ ने कहा इन पर कल फैसला लेंगे। इस बीच दिल्ली में अहमद पटेल ने भी सिंधिया से बात की। हालांकि सिंधिया बहुत आगे बढ़ चुके थे, जिससे वापस लौटने की गुंजाइश नहीं है।     


बड़ौदा राजपरिवार ने की सिंधिया और मोदी के बीच मध्यस्थता  


कमलनाथ सरकार के खिलाफ संघर्ष की पहली कोशिश नरोत्तम मिश्रा ने की थी, जब वह असफल हो गई तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री ने सारे सूत्र संभाले और बगावत का दूसरा अध्याय शुरू हुआ। रणनीति बनाने के लिए सोमवार को अमित शाह के घर बैठक हुई। इसमें जेपी नड्‌डा, शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्तम मिश्रा शामिल हुए। उधर, दिनभर मोदी और सिंधिया के बीच मुलाकात की खबर चलती रही, लेकिन बताया जा रहा है कि उनकी मुलाकात पहले ही हो चुकी है।


प्रधानमंत्री और सिंधिया के बीच मध्यस्थता सिंधिया के ससुराल पक्ष से बड़ौदा राजपरिवार की महारानी ने की। उन्होंने ही सिंधिया को भाजपा से संपर्क के लिए तैयार किया। उधर, प्रधानमंत्री ने सिंधिया से बातचीत का जिम्मा नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपा, क्योंकि ग्वालियर-चंबल के नेताओं में सिंधिया को लेकर अजीब सा पसोपेश रहता है। बताते हैं कि तीन दिन पहले मीटिंग के लिए सिंधिया तोमर के घर भी जा चुके हैं। वहीं आगे की रणनीति पर उनकी बातचीत हुई थी।  


जो सही कांग्रेसी, वो कांग्रेस में रहेगा
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि ज्योतिरादित्य से संपर्क की कोशिश हो रही है। बताया गया है कि उन्हें स्वाइन फ्लू है। जो सही में कांग्रेसी है, वो कांग्रेस में ही रहेगा।