महू के अंबेडकर विश्वविद्यालय में हुआ तीन दिवसीय पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के विरूद्ध बढते अत्याचार के प्रति पुलिस अधिकारियों की संवेदनशीलता’’ विषय पर डाॅ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू में तीन दिवसीय विशेष पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज दिनांक 24.02.2020 को विश्वविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा डाॅ. अम्बेडकर एवं तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व आई. पी. एस. डाॅ. पन्नालाल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी कुलपति प्रो. डी. के. वर्मा द्वारा की गयी। गेस्ट आॅफ आॅनर के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार एवं प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक एडवोकेट श्री अनिल त्रिवेदी उपस्थित थे। विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम के को-आॅर्डिनेटर अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के श्री अरविंद तिवारी उपस्थित थे। 
कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों को शाल, श्रीफल एवं विश्वविद्यालय का स्मृतिचिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अकादमिक संयोजक प्रो. आर. डी. मौर्य द्वारा तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विषय वस्तु पर विस्तार से प्रभाव डाला गया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डाॅ. पन्नालाल ने कहा की विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यशाला अत्यंत उपयोगी है एवं वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक भी है, क्योंकि आज के समय में विभिन्न प्रकार अपराध घटित हो रहे हंै ऐसे में उन अपराधोंकी सम्यक रूप से विवेचना कर उनकी रोकथाम करना आवश्यक है। प्रो. आनंद कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा की वर्तमान में मानव मनोविज्ञान को समझना आवश्यक है तभी हम समाज में बढ़ते अपराधों के प्रति संवेदनशील होकर न्याय के सपनों को सच करने में सफल हो पायेंगे। एडवोकेट श्री अनिल त्रिवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा की यह जो कालखंड है इसमें हमारा देश एवं समाज बहुत आगे है एवं हमारे सपने भी बहुत बडे हंै। संविधान की सार्वभौमिकता को बनाये रखने के लिए संवाद एवं मानवीय सरोकारों में संवेदनशीलता आवश्यक है। 
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुये विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. डी. के. वर्मा ने कहा की इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाओं में पुलिस अधिकारी अधिक से अधिक सहभागिता कर इसका लाभ प्राप्त करें ताकि समाज की बदलती हुई परिस्थितियों के अनुसार हम जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुये वंचित समुदाय को अधिक से अधिक न्याय प्रदान कर सकेंगे। इस कार्यक्रम की सार्थकता तभी होगी जब हम संवेदनशील होकर वंचित वर्ग के प्रति अधिक निडर, निष्पक्ष न्याय प्रदान करने में अपनी सक्रिय भुमिका निभाकर समाज में शाश्वत विकास की दिशा में सकारात्मक स्थायी पहल कर सकेंगे। उन्होंने कार्यशाला में आये सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दी। 
कार्यक्रम का संचालन डाॅ. रश्मि जैन ने किया एवं आभार कार्यक्रम के प्रशासकीय समन्वयक प्रो. किशोर जाॅन ने व्यक्त किया।


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