जिम्मेदारो की लापरवाही~ किसानों की मेहनत पर लग रही आग हर रोज कहीं ना कहीं हो रहा शॉर्ट सर्किट, मेहनत को अपने सामने जलते हुए बड़े दुख से देखते हैं किसान मगर कुछ कर नही पाते है

 आशीष यादव धार

खेतों में बीज डालने से लगाकर चार महीने तक अपना पसीना बहाकर कर फसल को पकाने का काम करते किसान मगर कई महीनों की मेहनत के बाद खेतों में गेहूं की फसल लहलहाने लगी है। कुछ ही दिनों में उसे काटकर बेचने के साथ ही खुद के भी सालभर खाने की व्यवस्था के लिए किसान किसानी करता। , लेकिन अचानक किसी कारण से लगी आग से सिर्फ किसानों के आरमानों पर पानी फेरा, बल्कि उसमें सामने ये चिंता भी खड़ी हो जाती हैजिन किसानों के गेंहू जलते है वह सालभर कैसे काम चलाएगा, ऐसे में अपनी फसल को अपनी ही आंखों से जलता देखकर कही किसान बेसुध होकर गिर जाते है आग इतनी भयानक होती है कि उसकी लपटें आसमान तक पहुंचती नजर आ है, कही क्षेत्र में आग के कारण गेहूं की फसल जलने की ये एक ही नहीं बल्कि कई घटनाई हुई हैं।

गर्मियां आते ही आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल तैयार खड़ी रहती है ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई जाती है।वही जिले में की बीते कुछ दिनों से खेतों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही है घटना से दर्जनों किसानों के गेहूं की खड़ी फसल जल गई। फसलों में आग लगने की घटनाएं प्रतिदिन सामने आने लगी है, प्रशासनिक अमला इन घटनाओं में गम्भीर नहीं दिख रहा है। जिससे किसानों के अरमानों पर पानी फिर नजर आ रहा है जिले में 10 दिन में अलग-अलग स्थान पर भीषण आग लग गई। आग पर काबू पाने के लिए कई जतन किए गए। कही पर खेत में आग लगी तो कही पर किसी अन्य स्थान पर आग लगी। बड़ी बात यह है कि इस आग से खेत में खड़ी लाखों रुपए की उपज जलकर स्वाहा हो गई है।


मरोल में हुआ हादसा 5 किसानों के गेहूं जले:

इंदौर अहमदाबाद सड़क मार्ग पर स्थित ग्राम भलगावड़ी मरोल पास किसानों के गेहूं के खेत में रविवार साढ़े 12 बजे आग लग गई। जिससे किसान की करीब 50 बीघा की गेहूं के खेत में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई । पीडि़त किसान ने आग लगने का कारण विद्युत लाइन के आपस में टकराने से फाल्ट हो गया। इसकी चिंगारी गेहूं की खड़ी फसल में गिरना बताया है। इसकी सूचना तत्काल नगर परिषद को दी गई तब फायर ब्रिगेड की गाड़ी एवं आसपास के लोगों की सहायता से आग बुझा रहे थे मगर आग तेज़ी से चल ने से 50 बीघा की गेंहू की फसल पर आग की चपेट में आ गई बताता देकि विद्युत लाइन के तारों में फाल्ट होने से हर रोज कही न कही से गेहूं जलने की जानकारी मिली है,।


तलवाड़ा मगजपुरा में भी लग चुकी है आग।

जिला मुख्यालय से 10 किलो मीटर तलवाड़ा मगजपुरा गांव में आगे लगने से 5 से 6 किसानो की खडी फसल में आग लग गई वहा भी आग पर काबू नही पाया जा सकता और 28 बीघा के गेंहू जलकर सुव्हा हो गए इसके पहले जिले में पांच अलग-अलग गांवों में आग लगने की घटना हुई। इससे किसानों को कही बीघा में पक कर तैयार खड़ा गेहूं स्वाहा हो गया। अन्य खेतों में आग न पहुंचे इसके लिए किसानों ने सूझ-बूझ व तत्परता दिखाते हुए फायर लारी आने के पहले स्वयं के साधनों से आग पर काबू पाने के जतन करके आग बुझाते है। ताकि आसपास के खेतों में आग न फैले। इससे बड़ा हादसा टल जाता है। जानकारी मिलने पर गांव के पटवारियों ने पंचनामा बनाया आते है आग लगने के अधिकत्तर कारण फाल्ट व शार्ट सर्किट ही होता है


केसुर मे शॉर्ट सर्किट से टूटा विद्युत तार  

खेत पर लगे विद्युत पोल पर शार्ट सर्किट हुआ। इससे तार टूट कर खेत में खड़ी फसल पर गिर गए जिससे गेहूं की फसल में आग लग गई। इससे खेत में 27 बीघा में खड़ी संपूर्ण फसल जलकर नष्ट हो गई। किसान के मुंह में आया निवाला छीन गया । गांव वालों ने आग बुझाने की कोशिश की किंतु आग पर काबू नहीं पा सके जिससे पूरी फसल नष्ट हो गई । प्रत्यक्षदशी किसानों ने बताया कि खेत में आग लगने की खबर ग्रामीणों को दी। इसके साथ ही पानी के टैंकर एवं दवाई छिड़कने की टंकियों व खेत की जुताई कर आग को अन्य खेतों में फैलने से रोका। अगर ऐसा नहीं होता तो कम से कम 400 बीघा की फसल चपेट में आ जाती और गांव तक आग फैल जाती। वही फाल्ट से निकली चिंगारी, गेहूं जलकर राख हुआ


आए दिन हो रही घटना

किसानों की फसल पककर तैयार हो गई किसान अपनी फसल कटवा रहे हैं तो कई किसान अभी फसल ना पकने के कारण खेतों में खड़ी है मगर लाइट शॉर्ट सर्किट के कारण खेतों में आग लग रही जिससे किसानों के मुंह आया हुआ निवाला जाता हुआ देखता है वह जिले में विगत दिनों से लगाकर अभी तक कहीं हेक्टेयर भूमि के गेहूं जलकर खाक हो गए मगर जिम्मेदार अब भी इस ओर ध्यान देने को तैयार है वहीं हर रोज जिले भर से कहिना कहीं फसलो जलने की खबर आ जाती है।




पंचनामा बनाने के बाद मिलती है सहायता राशि: 

किसान की फसल में आग लगती है तो पटवारी द्वारा पंचनामा बनाया जाता है वही पटवारी द्वारा पंचनामा में आरबीसी धारा 6/4 के अंतर्गत पंचनामा बनाया जाता है वही किसान नुकसानी 12 हजार रुपए से अधिक हेक्टेयर के हिसाब से दी जाती है जिसमे आवेदकों के दस्तावेज लिए जाती है उसको लेकर sdm को पस्तुत करते है उसके बाद किसान के खाते में आगज़नी का पैसा आता है।वही जब तक किसानों को इंतजार करते है वही अपनी फसल में आग लगी देख किसान बेसुध होकर गिर जाते है ग्रामीण द्वारा ठठास बंधाई जाती है वहीं सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि किसानों की आग लगने वाली फसलो से कम रहती है।

 

विद्युत विभाग की लापरवाही से होते हैं गेहूं में हादसे:

बता दें कि सबसे ज्यादा हादसे विद्युत मंडल के तारों में शॉर्ट सर्किट से होती है क्योंकि विद्युत मंडल की लापरवाही के कारण खेतों में झूलते पुराने व टूटे तारों के कारण आग की चिंगारी से गेहूं में आग लगती है इसका इनाम किसान को अपनी फसलो के जलाने के रूप में देना पड़ता है बता दें कि जैसे विभाग किसानों से बिल की वसूली करने का काम करता है अगर ऐसे ही जिम्मेदारी से खेतों में झूलते तारों को समय रहते मेंटेनेंस करता तो आज किसानों को लाखों रुपए की फसलो आग में जोकर अपने मुंह का निवाला नहीं गंवाना पड़ता।विभाग के गैस जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही से किसानों की साल भर की मेहनत आग की बलि चढ़ जाती है वही विभाग के कर्मचारी मेंटनस के नाम पर हजारों रुपए की बर्बादी करते है व फिर भी खेतो के खंभे व तार विभाग सही नही के कर पाता है व कागजो में कार्य पूर्ण हो जाता है

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