आंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप वाणिज्य पाठ्यक्रमों में प्रस्तावित संशोधन विषय पर ऑनलाइन वॉइस चांसलर कांन्क्लेव का आयोजन

महू। डॉ. बी. आर. आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप वाणिज्य पाठ्यक्रमों में प्रस्तावित संशोधन विषय पर ऑनलाइन वॉइस चांसलर्स कान्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति द्वारा विषय पर अपने विचार साझा किये गये । एपीएस विश्वविद्यालय, रीवा के कुलपति प्रोफेसर राजकुमार आचार्य ने कहा कि वाणिज्य आज के युग की जरूरत है जहां व्यापार विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है इसलिए हमें कॉमर्स को एक विषय मात्र तक सीमित ना रखते हुये कॉमर्स के माइक्रो लेवल पर ले जाना चाहिये और वाणिज्य संकाय के अंतर्गत विभाग बनाया जाना चाहिये । उद्योगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इससे संबंधित डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए। जिससे उद्योगों के अनुरूप कौशल तैयार किया जा सके। हमें 21 सदी के अनुरूप तकनीक के साथ कॉमर्स में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड रांची के कुलपति प्रोफेसर क्षिति भूषण दास ने कहा कि वाणिज्य के पाठ्यक्रमों को बनाते वक्त हमें मार्केट की जरूरतो को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम सामग्री और पेडागोजी तैयार करने की आवश्यकता है हमें ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए जिससे विद्यार्थी डेप्थ नॉलेज के साथ साथ प्रोफेशनल स्किल्स भी सीखे और मुख्य रूप से अंत में वह एक अच्छा नागरिक बने जो स्वयं के साथ देश, पर्यावरण और समाज सभी को बराबर महत्व दें, इसके लिए हमें विद्यार्थियों में प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स, क्रिटिकल थिंकिंग, इंटरपर्सनल स्किल्स भी सिखाने आवश्यकता है।

गुरु घासीदास सेंट्रल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार अग्रवाल ने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा जगत में गेमचेंजर के रूप में देखी जा सकती है मेरा सुझाव है कि सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति मिलकर सामूहिक रूप से एक कार्यशाला का आयोजन करें। जिसमें एक रूपता से पाठ्यक्रम सामग्री और पाठ्यचर्या तैयार कि जा सके। उन्होंने कोरोना का जिक्र करते हुए कहाँ कि हमारे लिए कोरोना एक अभिशाप नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखा गया ।

केंद्रीय विश्वविद्यालय केरला के कुलपति प्रोफेसर एच. वेंकटेश्वर लू ने कहा कॉमर्स पाठ्यक्रम बनाने के लिए हमें उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है, जिससे कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार कोर्स कंटेंट को डेवलप कर सके। आगे उन्होंने कहा कि कॉमर्स लेब बनाना चाहिए जिसमें जिसमें कंप्यूटर ही ना हो बल्कि कॉमर्स से संबंधित सभी प्रकार के प्रैक्टिकल नॉलेज, सॉफ्टवेयर एवं स्किल सीखने का पूरा पाठ्यचर्या एवं सामग्री उपलब्ध भी होनी चाहिए। हमें कॉमर्स के सभी पाठ्यक्रमों में इंटर्नशिप को ऐड करने की आवश्यकता है जिससे विद्यार्थियों को क्लास रूम ट्रेनिंग के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज भी मिल सकेगा ।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गंगा प्रसाद प्रसेन ने सुझाव दिया कि आज के इस व्यवसायिक युग में वाणिज्य विषय को हाई स्कूल के स्तर पर एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिये। आगे उन्होंने मल्टीडिसिप्लिनरी पर बात करते हुए कहाँ कि बीए - बीकॉम, बीकॉम-बीएड जैसे एकीकृत पाठ्यक्रम भी तैयार किये जाने चाहिये।

कार्यक्रम की अध्यक्ष और कुलपति ब्राउस प्रो. आशा शुक्ला ने कहा की इस कार्यक्रम का उद्देश्य कॉमर्स पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रस्तावित बदलाब पर गहन चर्चा करना है जिससे हम ऐसे पाठ्यक्रम तैयार कर सकंगे जो भविष्यगामी हो और जिसे विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर तैयार किये जाना चाहिये। अंत में कहा कि इस कार्यक्रम कि वृहद रिपोर्ट तैयार कि जाएगी।

कार्यक्रम में प्रस्तावना एवं स्वागत उद्बोधन में प्रो. आर. के. शुक्ला ने कहा कि कॉमर्स पाठ्यक्रमो में विषयवार गहन चर्चा कर संशोधन कि आवश्यकता हैं

कार्यक्रम के अंत में डॉ. विशाल पुरोहित द्वारा सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया गया तथा डॉ. भरत भाटी द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया ।