अस्पतालों से शमशान तक का यह सफर पता नहीं कब खत्म होगा-- राजेश बियानी( कांची), महू


समय का अंदाज इस बात से लगाइए कि पहले कोई बीमार होता था तो हम प्रार्थना करते थे कि जल्दी ठीक हो जाएगा लेकिन अब अस्पताल जाकर bed की दुआ करते हैं कि किसी के प्राण ना निकल जाए ताकि उसे बैड मिल जाए इस समय शहर में मौतों का आलम देख कर मन में कई तरह के प्रश्न चिन्ह आते हैं                                 

                *अस्पतालों के हालात ऐसे हैं जैसे गन्ने की चरखी से कोविड मरीजों के एटीएम ओं का रस  निकाला जा रहा है* स्वास्थ्य सेवाएं इतनी सस्ती होनी चाहिए कि इलाज के लिए कर्ज ना लेना पड़ेगा हालात ऐसे बिगड़ गए हैं कि *शहर का कोई भी वार्ड ऐसा नहीं बचा जहां कोरोना से मृत्यु नहीं हुई| ज्यादा बदतर स्थिति होने से पहले चेत जाइए*

 *आज सांसे नहीं लोगों का भरोसा भी टूट रहा है|* ऐसा नहीं कि  सिर्फ सरकार ही जिम्मेदार हैं निकल रही शव यात्रा को मौतों के पीछे कई प्रकार की गलतियां हम भी कर रहे हैं सोशल मीडिया वह अपने मित्रों के द्वारा अखबारों में आ रही चेतावनी के बाद भी पूरी गलतियों किसी पर भी थोपने की आदत हम हिंदुस्तानियों में जन्म से है  आपदा के समय  सच  बोले तो क्रूरता है मंजिल ना जाने से ना बताने से मिलती है वह मिलती है प्रयासों से समय आ गया है कि *देश के जिम्मेदार लोग सत्य की ओर चलें सही की ओर कदम उठाएं जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य निभाएं और एक काम जरूर करना चाहिए कि आप दूसरों की बेईमानी का ढिंढोरा नहीं पीटते हुए अपने ईमानदार प्रयास  करें इस समय मैं अपने ग्रुप मेंबर महूवासियों से यही निवेदन करता हूं कि *मास्क पहने दूरी बनाए यही इस दौर में एक सबसे बड़ा ईमानदारी का प्रयास होगा|*

                *राजेश. बियानी( कांची)*  महू