अवंति सूत मिल के पूर्व एमडी सांकलिया तेरह फरवरी तक पुलिस रिमांड पर

सनावद  मंगलवार सनावद पुलिस ने प्रकरण क्रमांक 310/16 में गिरफ्तार अवंति  मिल के पूर्व प्रबंध, संचालक (एमडी) राजेन्द्र हजारीलाल सांकलिया को  न्यायालय में पेश किया। अदालत ने 13 फरवरी तक पुलिस को रिमांड स्वीकृति दी है। 
        सर्वविदित है अवंति मिल मप्र टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन की थी। 2002 में बंद हो गई थी। उस दौरान सांकलिया मजदूर था। उसने फर्जी दस्तावेज के आधार पर मिल चालू करने के लिए अवंति मिल वर्कर्स सहकारी सोसायटी लिमिटेड बनाई। उसने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन से 62 करोड़ रु. का लोन ले लिया। इसके बाद मिल चालू भी हो गई, किंतु मशीनें आदि नहीं खरीदी। बाद में वह सोसायटी के अध्यक्ष के साथ मिल का मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) भी बन गया। इस दौरान उसने लोन की राशि का दुरुपयोग किया। प्रशासन द्वारा जारी नोटिस का भी वह ठीक से जवाब नहीं दे पाया। उसने अपने निजी आवास पर लोन की राशि में से 50 लाख रुपए खर्च कर दिए। 
    वहीं शिकायत पर सहकारिता विभाग ने मामला मे उज्जैन के सहकारिता संयुक्त आयुक्त वीपी मारण ने जांच की ।लेकिन जांच रिपोर्ट पर राजनीतिक दबाव के रहते दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी।  इसके बाद इंदौर से लेकर भोपाल तक हलचल मची। विधानसभा में भी मामला उठा और  मजदूरों और द्वारा चलने वाली  एकमात्र मिल का  प्रदेश शासन द्वारा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर भंग कर प्रशासक नियुक्त किया गया !
         मामले मे हुई कार्यवाही
सनावद पुलिस  अनुसार  27 जून 2016 मैं फरियादी काशीराम अवासे सहकारी अंकेक्षण अधिकारी  खरगोन द्वारा आरोपी के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई।  जिसमें अवंती मिल के प्रबंधक की हैसियत से राजेंद्र सांकल्या द्वारा फर्जी दस्तावेज के जरिए केंद्रीय जिला सहकारी बैंक खरगोन शाखा सनावद से अधिक ऋण राशि का आहरण और धोखाधड़ी करना आरोपित था। मामले में धारा 409,420, 465, 467, 468,471 भादवि में अपराध क्रमांक 310/16 मैं प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।     
    मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा पूछताछ चल रही थी । वही विवेचना  दौरान गृह निवास से फरार आरोपी सांकलिया पर पुलिस अधीक्षक द्वारा 1000 रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। 
   10 फरवरी को मुखबिर की सूचना पर सनावद थाना प्रभारी राजेंद्र सोनी द्वारा जहांगीराबाद पुलिस की मदद से आरोपी को पकड़वाया गया ।सनावद में पदस्थ आरक्षक बड़े राजा सिंह और खरगोन थाना आरक्षक शैलेंद्र राजावत की अभिरक्षा  में सनावद लाया गया। आरोपी को मंगलवार  पुलिस रिमांड (पीआर) हेतु पेश करने पर  माननीय न्यायालय द्वारा गुरुवार तक पीआर दिया गया है ।
ऋण का सही नहीं किया उपयोग
      दूसरी ओर 3 साल पहले प्रकरण में तत्कालीन थाना प्रभारी विनोद सोनी द्वारा प्रेस को दी गई जानकारी मुताबिक मिल से प्राप्त बिल-वाउचर व दस्तावेजों की जांच में पाया कि सांकलिया ने मिल को बैंकों से मिले करोड़ों रुपए के ऋण का सही उपयोग नहीं किया। सांकलिया के क्रिया-कलापों की जांच के बाद पाया गया कि मिल संचालन के दौरान भुगतान किए गए दो करोड़ 18 लाख एक हजार 736 रुपए के भुगतान के प्रमाण बार-बार मांगने के बावजूद वे नहीं दे पाए। साथ ही नौ लाख 20400 और प्रस्तुत पांच करोड़ 36 लाख 71417 रुपए के भुगतान बिल ऐसे मिले जिनका भुगतान संस्था ने किया, परंतु संबंधित बिलों की सामग्री की प्रविष्टि मिल गेट व स्टोर रूम में नहीं हुई है।
नहीं लगी11.50 करोड़ की मशीनें
        दस्तावेजी जांच में पाया गया सांकलिया ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन द्वारा स्वीकृत ऋण में से 11.50 करोड़ रुपए की मशीन मिल में स्थापित ही नहीं की। सांकलिया ने वेतन पर एरियर के 39 लाख 40 हजार रुपए स्वीकृत करवाकर 27 लाख 58 हजार रुपए स्वयं के आवास ऋण खाते में समायोजित कर लिए। सांकलिया ने स्वयं के लिए 50 लाख रुपए का ऋण भी संस्था से लिया। कपास खरीदी सदस्यों की नियुक्ति व विभिन्न नियुक्तियों के मामले में भी कूट दस्तावेजों की रचना पाई गई। विभिन्ना कार्यों में ओवर बिलिंग कर तीन करोड़ 81 लाख व 3 लाख 89 हजार का अधिक भुगतान करने के दस्तावेज भी मिले हैं। इसी प्रकार बिलिंग में कूट दस्तावेज की रचना, ओवर बिलिंग, मनमाना भुगतान, ऋण राशि का दुरुपयोग, परिवार के सदस्यों को लाभ पहुंचाना, नियम विरुद्ध नियुक्तियां व आर्थिक कदाचरण के व्यापक मामले सामने आए हैं।