‘स्वाधीनता संग्राम की गाथा: धार एवं मांडू रियासत’ विषय पर राष्ट्रीय व्याख्यान

अंबेडकर की प्रतिभा को बडोदरा स्टेट ने पहचाना- महाराज पवार

महू (इंदौर). डॉ. भीमराव अंबेडकर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और बड़ोदरा स्टेट से स्कॉलरशिप मिलने के बाद उनकी प्रतिभा का सही आंकलन हुआ.’ बात यह धार रियासत के महाराज हेमेन्द्र सिंह पवार ने कही. महाराज पवार डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू एवं हेरिटेज सोसायटी पटना के संयुक्त तत्वावधान में आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर ‘‘स्वाधीनता संग्राम की गाथा: धार एवं मांडू रियासत’ विषय पर मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास पर नजर डालें तो स्पष्ट हो जाता है कि किस तरह धार और मांडू रियासत ने भूमिका निभायी है. उन्होंने मराठा राज का भी विस्तार से उल्लेख किया. उन्होंने अनादिकाल से अब तक की परमार वंश की संस्कृति और सभ्यता का विस्तार से उल्लेख किया. ऋषि वशिष्ठ का उल्लेख करते हुए कहा कि परमार कुल का गौरव उनसे है. उन्होंने भगवान राम के बारे में कहा कि वे भी ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा ली थी और रघुकुल रीति की परम्परा यहीं से पल्लवित होती है.

 महाराज पवार ने विक्रमादित्य एवं राजा भोज का उल्लेख करते हुए परम्परागत संस्कृति और इतिहास का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ‘कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली’ वाली कहावत सुनी होगी. कुछ लोग इसके पीछे का कारण जानते होंगे. उन्होंने बताया कि एक बार एक राजा ने राजा भोज पर आक्रमण किया तो जनता ने यही कहावत कही जो लोक के चलन में आ गयी. 

 इसके पूर्व वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश जौहरी ने पवार राजवंश के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम की अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने अतिथि वक्ता महाराज श्री हेमेन्द्र सिंह पवार का स्वागत किया और विनम्रता के साथ उनका परिचय दिया. कुलपति महोदया ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यूजीसी द्वारा दो प्रोजेक्ट के लिए ब्राउस को मिलने को गौरव का विषय बताया. वेबीनार का संचालन योगिक साइंस विभाग के डॉ. अजय दुबे किया. कार्यक्रम के सह-संयोजक हेरिटेज सोयायटी के महानिदेशक श्री अनंताशुतोष द्विवेदी ने आभार माना. वेबीनार के सफल संचालन के लिए अकादमिक सन्योजक तथा मानद आचार्य भगवान बुद्ध पीठ एवम प्रशासनिक सन्योजक डॉ. एवं रजिस्ट्रार डा. अजय वर्मा के साथ विश्वविद्यालय परिवार का सहयोग रहा. 




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