तृप्ति मिश्रा को मिला पर्यावरण संरक्षण सम्मान

नई दिल्ली-देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के इस वर्ष के प्रर्यावरण संरक्षण सम्मान के लिए  मध्यप्रदेश इंदौर की तृप्ति मिश्रा को चयनित किया गया है। यह सम्मान इन्हें मुंबई में आयोजित हो रहे बारहवें राष्ट्रीय अधिवेशन मे ०३ फरवरी को सा रे गा मा पा  स्टूडियो में प्रदान किया गया।
मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में जन्मी तृप्ति बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही हैं। गाना, नृत्य ,कहानियां कविताएं लिखना, मिट्टी की मूर्तियां बनाना और पेटिंग स्केचिंग आदि इनके सृजनात्मक शौक था।माता जी अध्यापिका थीं और   हिंदी और संस्कृत की विदुषी थीं इससे तृप्ति को गहरी रुचि हिंदी साहित्य के प्रति होती गयी । आपके पति कैप्टन आशीष मिश्रा भारतीय सेना अधिकारी थे। जो 2002 में आर्मी छोड़कर अपने पैतृक शहर महू मध्यम प्रदेशआकर बसे जहाँ से तृप्ति की ज़िंदगी की दूसरी पारी शुरू हुई । घर में रहते हुए तृप्ति लगातार विभिन्न विषयों पर स्वतंत्र लेख लिखती रहीं। वक़्त के साथ बेटा थोड़ा बड़ा हुआ तो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ सामंजस्य बैठाते हुए लघु उद्योग निगम और खादी बोर्ड से जुड़कर विभिन्न विधाओं में गांव गांव में प्रशिक्षण देकर महिलाओं को स्वावलंबी बनाती रहीं ।साथ ही मिट्टी के गणेश का निःशुल्क प्रशिक्षण हर जगह देती रहीं ,ताकि प्लास्टर ऑफ पेरिस के गणेश ना खरीदकर महिलाएं घर पर ही मिट्टी के गणेश स्वयं बना सकें। निःस्वार्थ अनवरत इस काम को वे अपने प्रशिक्षण शिविरों  के साथ करती रहीं ।जून 2014 एक।सड़क दुर्घटना में बेटा और पति घायल हुए ।पति नहीं रहे ज़िन्दगी ठहर गयी मगर श्री गणेश की कृपा से अपने अंदर की मातृशक्ति के साथ तृप्ति एक बार  फिर सर उठाकर खड़ी हो गईं। ज़िंदगी की तीसरी पारी में सिक्योरिटी एजेंसी व्यवसाय  के साथ ,स्वतंत्र लेखन कार्य और पर्यावरण को सहेजने के प्रण को आगे बढ़ाती हुई इनकी अनंत यात्रा जारी है।
5000 से ज़्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण देने पर इन्हें सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम मंत्रालय से ,और मध्य प्रदेश महिला वित्त विकास निगम द्वारामहू के स्मोकिंग के काम को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने पर 2007 में पुरस्कृत किया गया है। इसके साथ ही
रोटरी क्लब द्वारा 2016 में रोटरी क्लब द्वारा इन्हें नेशन बिल्डर अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका हैऔर हाल ही में इन्हें नारी शक्ति अवार्ड से भी नवाजा गया है।


 


तृप्ति मिश्रा पर विशेष


मुम्बई महोत्सव के नाम से किया गया अखिल भारतीय सर्वभाषा समन्वय समिति के बाहरवें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुझे भी शिरकत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।पर्यावरण संरक्षण पर अनवरत मिट्टी के गणेश पर काम करने हेतु मुझे पर्यावरण संरक्षण सम्मान्य से विभूषित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर के सुविख्यात साहित्य सृजनकर्ताओं को सुनने को मिला जिसमें अनेक विख्यात कवियित्रीयो का सानिध्य और आर्शीवाद प्राप्त हुआ। डॉ मधु चतुर्वेदी,वीणा मित्तल,डॉ कल्पना पाण्डे,मधु मिश्रा, डॉ दमयंती शर्मा, सविता चढ्ढा, दिग्गज  गीतकार शेखर अस्तित्व, देवमणि पांडे वरिष्ठ गीतकार अभिलाष (इतनी शक्ति हमे देना दाता फेम), वरिष्ठगीतकार पटकथा लेखक रामगोविंद जी,युवा व्यंगकार पंकज प्रसून,सुविख्यात कवि सुदेन्धु ओझा, वागीश सारस्वत, विनोद श्रीवास्तव ,रामवरण ओझा,महेश बसैया,  केशवराय ,पुरुषोत्तम नारायण सिंह सहित पत्रकार कवि, दिनेश वत्स, राकेश शर्मा जी और न जाने कितने नाम, जैसे साहित्यकारों का कुम्भ हो। मायानगरी में किये गए इस कार्यक्रम को फिल्मी।चमक धमक से दूर ही रखा गया और सिर्फ साहित्य से जुड़े लोगों को ही इसमें जगह दी गयी। प्रज्ञान पुरुष सुप्रसिद्ध कवि श्री सुरेश नीरव जी की अध्यक्षता में हुआ  यह कार्यक्रम अपने आप में एक मिसाल बन गया ।मैं भाग्यशाली हूँ इस साहित्यिक महाकुम्भ में इतने अंतरराष्ट्रीय ,राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त   रचनाकारों को सुनने का मौका मिला और अपनी  रचना प्रस्तुत करने का अवसर भी प्राप्त हुआ।