कैदियों का तैयार कराया जा रहा है इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड

जेल विभाग द्वारा कैदियों का पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड तैयार कराया जा रहा है। इसके तहत अब तक प्रदेश की 37 जेलों में बंद हजारों कैदियों का आपराधिक रिकॉर्ड तैयार किया चुका है। इसमें कैदियों से मिलने वालों तक का रिकॉर्ड शामिल किया गया है। जिन जेलों का रिकार्ड तैयार हो चुका है उनमें सभी 11 केंद्रीय जेल और 23 बड़ी व संवेदनशील जिला जेलों के साथ महू, डबरा व अंबाह की तीन उपजेलें शामिल हैं। इसको इंटीग्रेटेड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) ई-प्रिजन प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। इसके तहत सभी बंदियों का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड भी दर्ज है। इसमें प्रिजनर्स मैनेजमेंट सिस्टम में फोटोयुक्त पूरा डाटा उपलब्ध है। वहीं, विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम में यदि कोई व्यक्ति दो से अधिक बार मिलने आता है तो कम्प्यूटर रिजेक्ट कर देता है। यदि कोई कैदी सजा भुगतने के बाद फिर से जेल में दाखिल होता है तो उसका रिकॉर्ड जेल में अब इलेक्ट्रॉनिक रुप से देखा जा सकता है।
यही नहीं यह रिकॉर्ड न सिर्फ मप्र की जेलों में देखा जा सकता है, बल्कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय से जुड़ा होने के कारण अन्य राज्यों में भी इसे एक्सेस किया जा सकता है। इसमें कैदियों से मिलने वालों का भी रिकॉर्ड शामिल है तो कैदी कितने बार बीमार पड़ा और उसे क्या बीमारी रही, इसकी भी रिपोर्ट उपलब्ध है।
एक दशक का रिकॉर्ड हुआ कम्प्यूटराइज
ई-प्रिजन प्रोजेक्ट में बीते 10 सालों के कैदियों का रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज किया जा चुका है। अब किसी भी कैदी की हिस्ट्री जानना हो तो उसे पुलिस आसानी से जान सकती है। कम्प्यूटराइजेशन में 9 मॉड्यूल के जरिए रिकॉर्ड रखा जा रहा है। इसमें कैदी द्वारा जेल में किए गए काम और उसे मिलने वाले पारिश्रमिक तक शामिल है। बड़ी व केंद्रीय जेल पर करीब 4.84 लाख रुपए और छोटी जेलों पर 2.30 लाख रुपए में ई-प्रिजन प्रोजेक्ट पूरा किया गया है।
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